पटना. बिहार भाजपा में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चल रही खींचतान को शत्रुघ्न सिन्हा ने और हवा दी है। उन्होंने अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा-पार्टी मौका देगी, तो बागडोर संभालने को तैयार हूं। बशर्ते, जिम्मेदारी सर्वसम्मति से मिले। राज्य में उपचुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन का ठीकरा उन्होंने सुशील मोदी के सिर फोड़ा। कहा-ताली भी कप्तान को और गाली भी कप्तान को। उपचुनाव में सारे फैसले सुमो ने लिए। उम्मीदवार तय किए। प्रचार में किसी को आगे आने नहीं दिया। अगर अच्छा परिणाम नहीं आया, तो जिम्मेदारी भी सुमो को ही लेनी पड़ेगी।
हालांकि अन्य राज्यों के उपचुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के लिए
नरेंद्र मोदी या
अमित शाह को जिम्मेदार मानने से साफ इनकार कर दिया। सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि उनके पास कद है, लेकिन पद नहीं है। प्रदेश भाजपा की बैठकों में उन्हें बुलाया तक नहीं जाता। इसके बाद भी उन्हें किसी से नाराजगी नहीं है। कहा-वह मुख्यमंत्री पद की रेस में भी नहीं हैं। यदि जिम्मेदारी दी गई, तो पीछे भी नहीं हटेंगे। चाहे वह जिम्मेदारी मंत्री की हो या संतरी की।
वैसे सुशील मोदी मेहनती और योग्य नेता हैं। लेकिन, सीपी ठाकुर, गिरिराज सिंह, चंद्रमोहन राय और प्रेम कुमार भी अच्छे नेता हैं। पार्टी में कोई भी निर्णय इन नेताओं से बात कर होनी चाहिए। मेरी राय में भाजपा की सरकार बनने पर अगला मुख्यमंत्री उसे बनाया जाना चाहिए, जिसके साथ बहुमत हो। जिस पर आरएसएस, पार्टी और सबसे बढ़कर बिहार की जनता भरोसा करे।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि पार्टी में युवाओं को तरजीह देना नुकसानदेह होगा। परिपक्वता और अनुभव की अनदेखी नहीं की जा सकती है। आडवाणी, जोशी, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार भाजपा के रत्न हैं। इनलोगों ने ही पार्टी को 2 से 188 सीटों तक पहुंचाया था। मेरी राय में अनुभव को भी तरजीह दी जानी चाहिए। राजनीति में आदमी 50 साल की उम्र में तो परिपक्व ही होता है। फिर अनुभव की अनदेखी कैसे की जा सकती है।