पटना. राज्यसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज चल रहे जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने बुधवार को मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार पर अपना हमला करते हुए कहा था कि पार्टी हराने के लिए उन्हें टिकट दे रही है, तो फिर चुनाव लड़ने से क्या लाभ है। गुरुवार को इसपर जद(यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने पलटवार करते हुए कहा शिवानंद तिवारी अभी बहुत आक्रोशित हैं, बाद में इस मामले पर बात करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि शिवानंद तिवारी का पार्टी से अब मोह भंग हो गया है। वे अपने पुराने घर में वापस जा सकते हैं। रादज प्रमुख लालू प्रसाद की तारीफ और नीतीश पर हमला इस बात के संकेत दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि शिवानंद तिवारी के साथ कई और लोग भी जद(यू) छोड़ सकते हैं। बहरहाल, जद (यू) इस पर किसी प्रकार की कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहा है।
शिवानंद तिवारी ने बुधवार प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि नीतीश मुझे हराने के लिए लोकसभा चुनाव लडऩे को कह रहे हैं। साबिर अली और एनके सिंह को दोबारा राज्यसभा न भेजने को लेकर भी मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया। तिवारी ने अपने में पत्र लिखा है कि नीतीश कुमार की दुश्मनी मुझसे थी, तो बाकी दो की बलि क्यों ले ली। उन्होंने यहां तक कह डाला कि नीतीश में आदमियत होती तो साबिर का टिकट नहीं काटते। शिवानंद ने प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को पत्र लिखकर इन बातों का जिक्र किया है।
बक्सर से चुनाव लड़ने के संबंध में 24 घंटे में फैसला लेने के पार्टी के अल्टीमेटम से आगबबूला शिवानंद ने पत्र में मुख्यमंत्री पर जमकर निशाना साधा है। कहा-अल्टीमेटम की खबर से स्तब्ध हूं। एनडीए से जब हमलोग बाहर निकले थे उसी समय नीतीश को कहा था कि मैं चुनाव नहीं लडऩा चाहता हूं। अगर मुख्यमंत्री के मन में यह बात थी तो उस समय क्यों नहीं कहा कि चुनाव लडिय़े। यह फैसला सुनाने के लिए श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल का मंच क्यों चुना गया। फैसला सुनाने का अंदाज और तेवर चुनाव जिताने वाला था या हराने वाला? इसलिए जब दोबारा पूछा गया तो फिर मैंने इनकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में अल्टीमेटम वाली बात कहां से आ गई।
तिवारी ने वशिष्ठ नारायण सिंह पर भी कटाक्ष करते हुए कहा- लगता है आपकी स्मरणशक्ति पर भी उम्र का असर समय से पहले पडऩे लगा है। 22 जनवरी की रात साढ़े नौ बजे आपने मुझे नीतीश का फरमान सुनाया था कि मुझे बक्सर से चुनाव लडऩा है। अविलंब मैंने बता दिया कि चुनाव नहीं लड़ूंगा। दूसरे दिन कर्पूरी जयंती जयंती समारोह में नीतीश ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि जो लोग कहते हैं कि पार्टी कमजोर है वे चुनाव लड़कर दिखाएं।
तिवारी ने लिखा है-जिस ढंग से पार्टी चलायी जा रही है उससे पार्टी कमजोर हो रही है, ऐसा सिर्फ मैंने ही राजगीर की शिविर में कहा था। तो एन.के.सिंह और साबिर को राज्यसभा न भेजकर लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए क्यों कहा जा रहा है। हद तो साबिर के मामले में हुई है। उसे तो रामविलासजी ने राज्यसभा में भेजा था। उसका तो वही टर्म समाप्त हो रहा है। दोबारा राज्यसभा में उसको भेजा जायेगा, इसी शर्त पर वह हमलोगों के साथ आया था।
मेरी जानकारी के अनुसार जो पक्की है पिछली बार नीतीश जब दिल्ली आए थे, बिहार निवास में साबिर और एन.के.सिंह के सामने किसी ने उनसे पूछा कि साबिर का टर्म तो समाप्त हो रहा है। अब इनका क्या होगा। तो नीतीश ने कहा-साबिर दोबारा राज्यसभा जाएंगे। दिल्ली विधानसभा चुनाव में साबिर का किस प्रकार दोहन हुआ है, यह बहुतों की जानकारी में है। जिसमें थोड़ी आदमियत होगी वह उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार कैसे कर सकता है।
मालूम हो कि जदयू ने सांसद एन.के.सिंह को बांका और साबिर अली को शिवहर से लोकसभा चुनाव लडऩे कहा गया है। साबिर अली ने सहमति जताई है। लेकिन, एन.के.सिंह अभी निर्णय नहीं कर पाए हैं।
आगे पढ़िए किसने क्या कहा...