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डाउनलोड करेंपटना. राजू और जवाहर जैसे हजारों लोग हैं, जिन्हें दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के बारे में जानकारी नहीं है। तीन वर्षों में योजना पर 15 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए गए, लेकिन 10 हजार लोगों को भी रोजगार नहीं मिल सका।
30 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य था, जबकि अब तक सिर्फ 18 हजार 873 को ही प्रशिक्षण दिया जा सका है। 18 से 45 वर्ष तक के महादलित वर्ग के युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार दिलाने के लिए 2010 में यह योजना शुरू हुई थी। एजेंसी के माध्यम से तीन से छह माह तथा एक वर्ष का प्रशिक्षण दिलाया जाता है। योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। इस दौरान इन्हें स्टाइपेंड भी मिलता है। लेकिन, जानकारी न होने व एजेंसी की लापरवाही के कारण लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा है।
इन ट्रेंडों में प्रशिक्षण
डीटीपी ऑपरेटर, टेली, सुरक्षा गार्ड, ड्राफ्ट मैन, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, ब्यूटीशियन, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, रेडियो एवं टीवी मेकेनिक।
कैसे मिलता है प्रशिक्षण
जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है। विभिन्न ट्रेंडों में प्रशिक्षण के लिए सीधे संस्थान में आवेदन दे सकते हैं। इसमें फोटो और जाति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। विकास मित्र, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी एवं जिला कल्याण पदाधिकारी को भी आवेदन देकर प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकता है।
प्रशिक्षण की स्थिति रोजगार के लिए कर रहा हूं प्रयास
महादलित युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार दिलाने के लिए ही यह योजना शुरू की गई है। हजारों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। लोगों को जागरूक के साथ एजेंसी पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग रोजगार पा सकें। जीतन राम मांझी,एससी-एसटी कल्याण मंत्री
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