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डाउनलोड करेंपटना. राज्य सरकार के विभाग व कार्यालय श्रम कानूनों के दायरे में नहीं आते। सरकार ने हाईकोर्ट में दायर शपथपत्र में यह जानकारी दी। शपथपत्र में विभागों ने कहा कि कांट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड एबोलिशन) एक्ट 1970 उद्योगों पर लागू होता है। सरकार का कामकाज इसके दायरे से बाहर है।
हाईकोर्ट ने बिहार राज्य डाटा इंट्री ऑपरेटर (कांट्रैक्ट) एसोसिएशन द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सरकारी विभागों से इस संबंध में जवाब मांगा था। एसोसिएशन ने राज्य सरकार के विभागों और कार्यालयों में श्रम कानूनों का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने पिछले साल 27 नवंबर को सुनवाई के दौरान वित्त, पथ निर्माण, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, सामान्य प्रशासन, श्रम और ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिवों को अलग-अलग शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया था। शपथपत्र में विभागों ने कहा कि याचिकाकर्ता कांट्रैक्ट लेबर की श्रेणी में नहीं आते, क्योंकि सरकार द्वारा उनको स्थायी या अस्थायी पदों पर नियुक्त नहीं किया गया है।
क्या है मामला
राज्य के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में कांट्रैक्ट पर एक साल से लेकर 12 सालों की अवधि से काम कर रहे ऑपरेटरों ने अपने शोषण के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बिहार राज्य डाटा इंट्री ऑपरेटर (कांट्रैक्ट) एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा कि उनको वेतन के रूप में प्रतिमाह सरकार 7649 रुपए देती है, जिसमें से उनके हाथ में 6341 रुपए आते हैं, जबकि राज्य सरकार अपने स्थायी कर्मचारियों को इसी कार्य के लिए करीब 25,000 रुपए प्रतिमाह वेतन देती है। बिहार राज्य डाटा इंट्री ऑपरेटर (कांट्रैक्ट) एसोसिएशन का दावा है कि पूरे राज्य में डाटा इंट्री ऑपरेटरों की संख्या 55०० के करीब है।
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