पटना. भाजपा नेता
सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने घोषणाओं को मजाक बना कर रख दिया है। पिछले तीन दिन के मुख्यमंत्री ने पटना हाईकोर्ट की तीन बेंच स्थापित करने की घोषणा कर खुद को हास्यास्पद बना लिया है। दूसरी ओर मांझी की सरकार में अफसरों को प्रताडि़त और अपमानित किया जा रहा है।
नतीजतन ईमानदार और कर्मठ अधिकारी बिहार छोड़ कर बाहर जा रहे हैं जबकि भाजपा गठबंधन की सरकार में दिल्ली से अधिकारी बिहार आने को आतुर रहते थे। ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के रिमोट की बैटरी कमजोर हो गई है। रिमोटचालित सरकार की दिशाहीनता का कुप्रभाव प्रशासन और विकास पर साफ देखा जा रहा है।
सुमो ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पटना हाईकोर्ट की एक-एक बेंच गया, पूर्णिया और भागलपुर में खोलने का ऐलान तो कर दिया है मगर क्या भी बेंच स्थापित करना संभव हो पाएगा? पांच वर्ष पूर्व सरकार ने डिग्री कॉलेजविहीन अनुमंडलों में कॉलेज खोलने का निर्णय लिया था, वह तो अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
इसे छोड़ कर अब मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के लिए प्रत्येक अनुमंडल में एक-एक डिग्री कॉलेज खोलने की नई घोषणा कर दी। अपने तीन महीने के कार्यकाल में आधा समय गया में गुजारने वाले मुख्यमंत्री ने गया के लिए जितनी घोषणाएं कर दी हैं, उससे लगता है कि कहीं वे पटना की जगह गया को राजधानी ना घोषित कर दें?
सुमो ने कहा कि खाद्य विभाग राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने में फिसड्डी साबित हो रहा है मगर वहां तबादलों का दौर जारी है। बेवजह अधिकारियों को तबादले के नाम पर परेशान किया जा रहा है। एसएफसी के एमडी अरविन्द चौधरी का विभागीय मंत्री की जिद पर तबादला कर दिया गया।
प्रधान सचिव दीपक प्रसाद का सात दिन में ही स्थानांतरण कर वहां बी. प्रधान को लाया गया। प्रधान का भी तबादला कर उन्हें कृषि विभाग में भेजा गया, मगर कृषि मंत्री की नापसंदगी के बाद 24 घंटे के अंदर उनका तबादला रोक दिया गया। पथ निर्माण मंत्री की मनमानी भी सुर्खियों में रही है। मंत्री ने कार्यभार संभालते ही मुख्यमंत्री का आदेश लिए बिना 150 विभागीय इंजीनियरों के स्थातंतरण पर रोक लगा दिया।