पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री
सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनामिक्स में दिए अपने भाषण में राजनीतिक ईमानदारी का परिचय नहीं दिया। वहां बिहार के विकास की उपलब्धियां गिनाने के साथ उन्हें यह बताना चाहिए था कि ये तब की हैं, जब भाजपा और जदयू की मिली-जुली सरकार थी। वह एकल जदयू की नहीं, बल्कि भाजपा के प्रयासों का भी प्रतिफल है। ऐसा न कर उन्होंने बिहार की जनता के साथ भी छल किया है।
जिस नीतीश कुमार को विकास पुरुष बताकर मुख्यमंत्री ने ढोल पीटा, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद एक साल के उनके कार्यकाल में बिहार कैसे विकास से बेपटरी हो गया? वर्ष 2013-14 में बिहार की विकास दर आधी क्यों हो गई? आज मुख्यमंत्री की कुर्सी उसी लालू प्रसाद के समर्थन पर टिकी है, जिनके शासनकाल को ‘जंगलराज’ तक कहा गया था।
इधर, चौरसिया ने भी मांझी पर बोला हमला : भाजपा विधायक रामेश्वर चौरसिया ने लंदन में मुख्यमंत्री के भाषण को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने देश की भद्द पिटवाई है। उन्हें देश के किसी मामले पर वहां चर्चा ही नहीं करनी चाहिए थी। क्या वे वहां केंद्र-राज्य का झगड़ा निपटाने गए हैं? सीएम को पहले तो यह बताना चाहिए कि बिहार की बदहाली के लिए जिम्मेवार कौन है?