पटना. भाजपा नेता
सुशील कुमार मोदी मंगलवार को एक बार फिर नीतीश कुमार पर निशाना साधा। जनता दरबार के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में दवा घोटाला हुआ है, उसकी जांच की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव और सचिव को दी गई है। यह ठीक वैसा ही जैसे नौकर को मालिक की जांच करने के लिए कहा जाए।
उन्होंने कहा- जुलाई में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्रधान सचिव मेडिसन और सर्जिकल आइटम की जांच कर एक महीने में अपनी रिपोर्ट दें, लेकिन अब तक जांच शुरू नहीं हुई। जब भाजपा कोटे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव और अश्विनी चौबे सीबीआई जांच के लिए कह रहे हैं, तो भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस व पारदर्शिता की बात करने वाले नीतीश कुमार इससे डर क्यों रहे हैं।
बीएमएसआईसीएल की सभी खरीद व घोटाला उस समय हुआ है, जब नीतीश कुमार स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार में थे। चारा घोटाले में लालू प्रसाद भी इसी प्रकार कहते थे कि संचिका पर मेरा हस्ताक्षर कहां है, सीबीआई जांच की क्या आवश्यकता है? यानी, बड़े भाई का प्रभाव छोटे भाई पर होने लगा है। सरकार बीएमएसआईसीएल के दोषी अधिकारियों का बचाने में लगी है। पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर की दवा घोटाले को लेकर भाजपा कोर्ट जाएगी या नहीं, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता करती है। इतना बड़ा घोटाला हो गया, लेकिन अभी तक किसी को निलंबित नहीं किया गया।
दूसरे राज्यों में ब्लैकलिस्टेड, पर बिहार में कर रहीं दवा आपूर्ति
सुशील मोदी ने कहा कि 9 दवा कंपनियां, जो दूसरे राज्यों में ब्लैकलिस्टेड हैं, अब भी बिहार में दवा आपूर्ति कर रही हैं। इन कंपनियों में प्रमुख हैं- जाजू सर्जिकल, डीजे लैब, सीरोन ड्रग्स एवं फार्मासिस्टयूकल्स, लीलाइफ लैब, एसजीएस फार्मा, यूनीजुल्स लाइफ साइंस, विवेक फार्मास्युटिकल्स, बायो जेनेटिक ड्रग्स और एएलपीए लैब।
जांच रिपोर्ट अगले हफ्ते
स्वास्थ्य विभाग के उपसचिव अनिल कुमार ने कहा कि बीएमएसआईसीएल की दवा गड़बड़ी की जांच करने वाली विभाग के सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता वाली विशेष जांच टीम की रिपोर्ट अगले हफ्ते आ जाएगी। तब साफ हो जाएगा कि बीएमएसआईसीएल ने दवा खरीद में कितने रुपए और किस तरह की गड़बड़ी की है। जांच टीम ने मंगलवार को दवा खरीद से जुड़े सारे तथ्यों की गंभीरता से पड़ताल की।
तत्काल मेडिपॉल, लैबोरेट समेत 23 कंपनियों से दवा खरीदने पर रोक का आदेश है और ब्लैकलिस्टेड समेत अधिक दाम पर खरीदी गई कुल 96 दवाओं की खरीद पर पाबंदी है। मेडिपॉल और लैबोरेट के साथ ओमेगा दवा कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर उनसे दवा खरीद पर रोक लगाई जा चुकी है। साथ ही 21 एजेंसियों से दवा खरीद पर भी रोक लगा दी गई थी, जिनसे अधिक दाम पर दवा खरीदे गए थे।
(जनता दरबार में मोदी)