पटना. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व व राजनीतिक चिंतक योगेंद्र यादव ने कहा कि सटीक आंकड़े हो, तो निष्कर्ष पर पहुंचना आसान हो जाता है। जमीनी आंकड़े ही जमीन की तासीर और सामाजिक राजनीतिक परिवर्तन के कारण बनते हैं। इस माइक्रो स्टडी से टॉप लेवल पर होने वाले सामाजिक परिवर्तनों को बखूबी समझा देते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य है कि इस दिशा में किसी भी राज्य में पंचायत चुनावों के नतीजों को ठीक से सहेजा नहीं गया।
उन्होंने कहा कि जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। वे संस्थान की ओर से आयोजित विमर्श में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि जानने में मदद मिलेगी। इससे यह भी पता चलेगा कि समाज को नियंत्रित करने वाली ताकत किन हाथों में जा रही है और उनकी सोच में क्या नयापन है। जहां तक पंचायत चुनाव में बूथों और वोट प्रतिशत का सवाल है, उसकी भी चाल समझनी आसान होगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा व लोकसभा के बूथों के गठन का तरीका अलग होता है, लिहाजा उनका भी मिलान किया जाना चाहिए। मौके पर विमर्श में संस्थान के निदेशक श्रीकांत, सरोज द्विवेदी, प्रो. अभय, मणिकांत ठाकुर, रजनीश उपाध्याय, अजय कुमार, हेमंत कुमार, अरविंद कुमार, फैयाज इकबाल आदि ने भी विचार रखे।
आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर भाजपा पर जमकर हमला बोला। पटना के आईएमए हॉल में समाजवादियों को संबोधित करते हुए आप के योगेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की विविधता एवं लोकतंत्र लिए खतरा बन चुके हैं। कांग्रेस के समय भी देश की नीतियां कॉर्पोरेटर तय करते थे। वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियां भी कॉर्पोरेटर ही तय कर रहे हैं। विपक्ष में बैठने के समय भजपा जिस अर्थ नीति पर हंगामा करती थी, आज उसी को लागू कर रही है। इसका फायदा आम लोगों को नहीं मिलेगा। देश के एक से दो प्रतिशत लोगों को ही इसका लाभ लेंगे।
परवीन अमानुल्लाह ने कहा कि किशन पटनायक के जीवन से राजनेताओं को सीख लेने की जरूरत है। आने वाले समय में बड़ा राजनैतिक संघर्ष होने वाला है। समाजवादी चिंतक किशन पटनायक की 10वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में विश्वनाथ बागी, सोमनाथ त्रिपाठी और रामपाल नूतन अग्रवाल ने भी वैकल्पिक राजनीति की दशा एवं दृष्टि पर प्रकाश डाला।
आप देगी विकल्प
योगेंद्र यादव ने कहा कि लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के गठबंधन का सीधा मुकाबला भाजपा से है, जबकि जनता तीनों पाटियों से खफा है। इस परिस्थिति में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों निकल जाएं, तो राज्य के लोगों को नया राजनीतिक विकल्प मिल जाएगा।