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यहां विषकन्याएं देती हैं मौत का तोहफा, रेड लाइट एरिया की ये है सच्चाई!

यदि आपके कदम जरा भी फिसले तो आप मौत की आगोश में जा सकते हैं।

Danik Bhaskar | Oct 03, 2013, 12:00 AM IST
पूर्णिया। पूर्णिया में एक ऐसी सड़क है जो जानलेवा है। इतनी जानलेवा कि यदि आपके कदम जरा भी फिसले तो आप मौत के आगोश में जा सकते हैं। मौत दुर्घटना से नहीं, बल्कि होती है जहर से। यह जहर देती हैं वो औरतें जो किसी विषकन्या से कम नहीं। हम बात कर रहे हैं पूर्णिया से होकर गुजरने वाली एन एच 31 की, जिसके इर्द-गिर्द तीन रेड लाइट एरिया हैं, जहां सौ से भी ज्यादा लड़कियां रोजाना लोगों को एड्स की सौगात दे रही हैं। एड्स एक ऐसी बीमारी जिसकी दवा तो है, लेकिन इलाज नहीं। एक ऐसी बीमारी जिससे तिल-तिल कर हो जाती है मरीज की मौत।
आगे की स्लाइड्स में देखें पूर्णिया के रेडलाइट एरिया की Exclusive तस्वीरें और जानें कैसे देती हैं ये विषकन्याएं मौत, साथ में पढ़ें इनसे जुड़ी कुछ और खास बातें...
नोट: बिहार से हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी सीरीज, जिसके तहत हम बिहार के इमेज को खराब करने वाले गलत कार्यों के प्रति लोगों को आगाह करेंगे। इसके तहत अंधविश्वास, रेडलाइट एरिया, भूत-प्रेत आदि की खबरें चलाएंगे और बताएंगे कि कैसे विकास की ओर अग्रसर बिहार में गलत अवधारणाएं अब भी पनप रही हैं।
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एड्स का जहर बांटने वाली इन लड़कियों का पहला ठिकाना है 'हरदा बाजार'। यहां शाम होते ही सज जाता है इनका बाजार। इस बाजार में अधिकांश मजदूर वर्ग के लोग अपनी तृष्णा शांत करने आते हैं और जाने-अंजाने एड्स की सौगात साथ ले जाते हैं। फिर यही सौगात अपने साथी को भी बांट आते हैं।

देह का ये कारोबार होता है हरदा बाजार से आठ किलोमीटर दूर एनएच 31 के ही किनारे सनोली चौक के पास। यहां की सेक्स वर्कर्स मुजरा वाली के नाम से मशहूर हैं और इनका ठिकाना मुजरा पट्टी के नाम से जाना जाता है।

पूर्णिया के रजवाड़े द्वारा इनके पूर्वजों को सौ साल पहले यहां बसाया गया था। अब न तो राजा रहे और न ही रजवाड़े, लिहाजा धीरे-धीरे मुजरा का बाजार बंद हो गया और शुरू हो गया देह व्यापार। लेकिन, इस बाजार के दरवाजे चुनिंदा हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के लिए ही खुलते हैं।

रिहायशी इलाके के बीचों-बीच बसी इस आबादी का विरोध कई बार हो चुका है। ये लोग आर्थिक रूप से इतने मजबूत हो गए हैं कि इनके पक्के मकान हैं और ठाठ-बाट रईसी।

तीसरा और सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया गुलाब बाग मंडी के पास है जो एन एच 31 पर सनोली चौक से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। यहां ये धंधा सुबह से लेकर शाम तक चलता रहता है। प्रशासन जब भी रेड लाइट एरिया के उन्मूलन और सेक्सवर्करों के पुनर्वास की शुरुआत करता है तो यही से। लेकिन, इस शुरुआत का कोई अंत नहीं होता।

एड्स के आंकड़े भी डराते हैं। केवल पूर्णिया सदर अस्पताल में इस साल एड्स के आंकड़े सत्तर पार कर चुके हैं। एड्स के खतरनाक वाइरस HIV से पीड़ित अधिकांश मरीज या तो सेक्स वर्कर हैं या फिर इनके आगोश में जाने वाले लोग। कुछ ऐसे भी लोग  HIV से पीड़ित हैं जिनकी गलती बस इतनी होती है कि वे अपने जीवनसाथी पर भरोसा करते हैं।

अपना शरीर बेचकर रोटी खाने वाली इन लड़कियों की जिंदगी की अजीब दास्तां होती है। पहली बार जिस्मफरोशी करने वाली ये लड़कियां या तो यह धंधा विरासत में पाती हैं या अपने ही प्रेमी या रिश्तेदारों से धोखा खाने के बाद यहां पहुंचा दी जाती जाती हैं।

यहां जो भी लड़कियां मौजूद हैं, वो अपने सारे रिश्ते-नाते भुला चुकी हैं। ये लड़कियां भी इस दलदल से निकलना चाहती हैं, लेकिन इनका बाहर निकलना और समाज के साथ तालमेल बिठाना एक बहुत बड़ी समस्या है।

लोगों के विरोध प़र ये सेक्स वर्कर्स कहती हैं कि यहां रात के अंधेरे में उसी समाज के लोग आते हैं जो दिन में उनका विरोध करते हैं।