अररिया. रानीगंज प्रखंड के मझुआ पूरब चिरवा रहिका गांव में अज्ञात बीमारी से एक सप्ताह में सात बच्चों की मौत हो गई है। जबकि एक दर्जन से अधिक बच्चे बीमार हैं। गांव में लगातार हो रही मौत से ग्रामीण सहमे हैं।
अकेले गांव के गुलाब ऋषिदेव के घर में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत के बाद गांव में मातमी सन्नाटा है। इधर, महादलित टोले में हो रही इस बीमारी से मौत की सूचना के बाद सिविल सर्जन बीके ठाकुर ने महामारी विशेषज्ञों की एक टीम भेजने का निर्देश दिया है। सीएस ने बताया कि रानीगंज रेफरल अस्पताल की एक टीम गांव पहुंच गई है और बीमार बच्चों का इलाज कर रही है।
अज्ञात बीमारी से गुलाब ऋषिदेव के दो पुत्र व एक पुत्री, सुरेंद्र ऋषिदेव के सात वर्षीय पुत्र, चलीतर ऋषिदेव के तीन वर्ष का बेटा, वीरेंद्र ऋषिदेव के तीन वर्ष का बेटा मोनू, शैलेंद्र ऋषिदेव की तीन साल की पुत्री की मौत हो चुकी है। जबकि प्रमोद जायसवाल की पुत्री गुड़िया कुमारी, इंद्रजीत ऋषिदेव की पुत्री काजल, फुलो ऋषिदेव का पोता मोहित के अलावा गांव के गुलशन कुमार, विपिन कुमार, चुन्ना,
सोनी, रूची, फुलटन समेत एक दर्जन बच्चे इस बीमारी से आक्रांत हैं।
बीमारी के लक्ष्ण
ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को पहले हल्का बुखार होता है। इसके बाद उल्टी होने लगती है। और धीरे-धीरे मुंह से उल्टी के माध्यम से खून निकलने लगता है। जब तक बच्चों को चिकित्सक के पास ले जाते हैं, तब तक बच्चे की मौत हो जाती है।
झोलाछाप डॉक्टर बने हैं सहारा
रानीगंज प्रखंड से 20 किलोमीटर की दूरी पर बसा है मझुआ पूरब चिरवा रहिका गांव के गोरिया टोला। गांव में कोई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं है। गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं है। पगडंडियों के सहारे लोग गांव तक पहुंचते हैं। ऐसे में झोलाछाप चिकित्सक से ही परिजन अपने बीमार बच्चों का इलाज कराते हैं।
करा रहे हैं झाड़-फूंक: ग्रामीण अंधविश्वास के कारण झाड़-फूंक का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण रेखा देवी, जनार्दन ऋषिदेव, भागे देवी, जूलिया देवी, गोमती देवी, कुलू ऋषिदेव आदि ने बताया कि बच्चों को इलाज के लिए पूर्णिया, कटिहार और भागलपुर तक ले गए, परंतु ठीक नहीं हुआ।
(रानीगंज प्रखंड के रहिका गांव में अज्ञात बीमारी से हो रही मौत से डरे हुए हैं महादलित टोला के लोग)