शहर का नाम रखने की इससे अद्भुत घटना नहीं सुनी होगी आपने!

Feb 17, 2012, 12:25 AM IST
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आरा। भोजपुर का मुख्यालय आरा का प्राचीन नाम आराम नगर ही था। लेकिन इस बात पर तब प्रश्न चिन्ह लग जता है जब वीर कुंवर सिंह विवि के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा.विक्रमादित्य सिंह कहते है कि राजा मयुरध्वज ने भक्ति की परीक्षा देने के लिए अपने पुत्र को लकड़ी चिरने वाले आरा से काट दिया था। भगवान को प्रकट होने के बाद जब मयूरध्वज का बेटा जिंदा हुआ तो इस नगर का नाम आरा रखा गया।





आरा के संदर्भ में ये भी कहा जाता है कि यहां पहले काफी आरण्य (जंगल) हुआ करते थे, जिसकी वजह से धीरे धीरे आरण्य से इस शहर का नाम आरा होता गया। वहीं आरा में मां आरण्य देवी का मंदिर भी है जिसके कारण ऐसी मान्यता है कि आरा का नाम उनके नाम पर रखा गया। खैर जो भी आऱा के इस इतिहास को जानने के बाद वहां के लोग भी काफी प्रसन्नचित होते हैं।





प्राचीन ग्रंथों के अनुसार





प्राचीन ग्रंथ महाभारत और रामायण के अनुसार आरा का प्राचीन नाम आराम नगर था। संस्कृत, प्राकृत पालि में आराम शब्द का अर्थ वाटिका, बगीचा होता है। ऐसा माना जाता है कि वनों, उपवनों के मनोरम प्रदेश में आराम करने के लिए राजा महराजा आते थे। जहां आरण्य देवी यानी कि वन देवी सुख समृद्धि की वर्षा करती थीं। वहीं पकड़ी मुहल्ले के बारे में कहा जाता है कि पाण्डवों ने अज्ञात वास के दौरान बांकासुर का वध किया था । उस जगह पर बाकासुर के पिंडी पर आज भी कुछ जातियों द्वारा विधि विधान से पूजा किया जाता है ।





इतना ही नहीं अयोध्या के राजा दशरथ अपने प्राणप्रिय राजकुमार राम लक्ष्मण को जीवन की शिक्षा लेने के लिए इसी जनपद के बक्सर में महर्षि विश्वामित्र के पास भेजा था। और जब युवराज सीता स्वयंबर में भाग लेने हेतु मिथिलापुरी जाने लगे तो करूषदेश वर्तमान में कारीसाथ होते हुए आरा को पदरज से पवित्र करते हुए वैशाली महानगर के सौन्दर्य निहारते हुए आगे बढ़े थे।





वर्तमान में आरा





आरा के बारे में गिरीराज किशोर की किताब पहला गिरमिटिया में भी चर्चा है। किताब के अनुसार गिरमिटियों में से पहला शख्स जिसने विदेश की धरती पर कदम रखा था वो आरा का ही था। साथ हीं पहले आरा के बारे में 'आरा जिला घर बा त कवना बात के डर बा' जैसी बातें भी बोली जाती थी, जो लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध थी। गाहे-बगाहे आज भी अन्यत्र राज्य के बुजुर्ग लोग बिहारियों के सामने इस लोकोक्ति को कहते हैं। फिलहाल आरा बिहार का एक नगर निगम है जो पटना से 60 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी आरा के चंदवा गांव की हैं, जबकि पूर्व रेल मंत्री राम सुभग सिंह, बाबू जगजीवन राम की जन्मभूमि भी आरा जिला ही है।







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