सासाराम। पाकिस्तान के लाहौर जेल में सात साल की सजा काटकर वापस लौटने वाले युवक टुनटुन पासवान की कहानी अजीब है। यह युवक 2006 में नौहट्टा थाना में दर्ज मारपीट के एक मामले का अभियुक्त था। जिसमें गिरफ्तारी के डर से वह पंजाब नौकरी करने भाग गया। उसे क्या पता था कि एक छोटे से मुकदमे से भागकर वहा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के जेल में जुल्मो सितम सहने के लिए जाना पड़ेगा। नौहट्टा में दर्ज मारपीट की उस प्राथमिकी में टुनटुन के दो दोस्त त्रिवेणी पासवान व भोदा पासवान को जेल जाते देख वह डर गया था। जहां से सीधे भागकर पंजाब के अमृतसर शहर में पहुंच गया। वहां एक किसान के घर एक सप्ताह नौकरी करने के बाद पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया जिसे पाकिस्तानी सैनिको ने गिरफ्तार करने के बाद लाहौर जेल में डाल दिया।
जबरन पढ़ाया जाता था पांचो वक्त का नमाज
पाकिस्तान के लाहौर जेल से सात साल की सजा काटकार लौटे टुनटुन पासवान ने वहां जेल में दी गई यातनाओं को एक-एक कर बताना शुरू किया है। पहले दिन युवक ने बताया कि वहां कैदियों को जबरन पांचो वक्त की नमाज पढाई जाती है। वैसा नही करने पर बेरहम पिटाई होती है। इसके अलावे जेल के अंदर तरह-तरह की यातनाएं भारतीय बंदियो को मिलती है। खाने पीने में भी भेद भाव बरता जाता है। टुनटुन ने बताया कि लाहौर जेल में अभी भी लगभग दो दर्जन भारतीय कैदी बंद हैं। जिन्हे प्रतिदिन तरह-तरह की यातनाएं दी जाती है। फिलहाल टुनटुन काफी अस्वस्थ्य है इसलिए बहुत कुछ बताने से परहेज भी करता है। जिसे स्थानीय चिकित्सको से जांच कराने के बाद ईलाज चल रहा है।