दरभंगा/मुजफ्फरपुर। अपनी मां के ख्वाबों के हकीकत करने के लिए प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद जहांगीर वारसी अब सामाजिक कार्य में जुट गए हैं। बिहार के बेहद पिछड़े इलाके से ताल्लुक रखने वाले डॉ. वारसी ने अमेरिका के प्रतिष्ठिति विश्वविद्यालयों में अध्यापन तक का सफर तय किया। इस दौरान उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान भी मिले। उनकी कामयाबी की कहानी स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
डॉ. वारसी का पैतृक गांव बर्रा बिहार के दरभंगा जिले के कुशेवर ब्लॉक के अंतर्गत आता है। कमला, कोसी और कारेह नदी के संगम के नजदीक आने वाला उनका गांव साल में तीन महीने पानी में डूबा रहता है। पानी गांव को और निराशा लोगों के जीवन को घेर लेती है। इसी निराशा को आशा में बदलने और अपनी मां के ख्वाबों को पूरा करने के लिए डॉ. वारसी अब अपने गांव में ही स्कूल और मदरसा चला रहा हैं। उनकी योजना जल्द ही गांव में एक प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित करने की भी है।
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