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पलामू टाइगर प्रोजेक्ट से 8 साल में गायब हुए 31 बाघ

9 वर्ष पहले
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रांची।अभी तक मुहावरों में कागजी शेर होते थे, पर पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के आंकड़े बताते हैं कि यहां सचमुच कागजों पर बाघ दिखते और खत्म होते रहे। 2004 में बताया गया कि 38 बाघ प्रोजेक्ट में हैं। पर 2011 में विभाग को अचानक पता चला कि मात्र 14 बाघ ही बच गए हैं। अब 2012 में वन अधिकारी कह रहे हैं कि 7 ही बाघ पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में बचे हुए हैं। यह जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर 8 सालों में 31 बाघ कहां चले गए। वो मार डाले गए या कभी थे ही नहीं। हालांकि विभाग के कई जानकार कहते हैं कि प्रोजेक्ट के अफसर केवल खानापूर्ति के लिए बाघों की संख्या बढ़ाकर बताते रहे।





झारखंड बनने के बाद घटने लगे बाघ





अविभाजित बिहार में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती रही। पर झारखंड में हुआ पहला टाइगर सर्वे बताता है कि राज्य बनते ही बाघ रूठ गए, क्योंकि उनकी संख्या लगातार घटने लगी। 2004 की गणना के अनुसार पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में 38 बाघों की संख्या बताई गई। 2007 में यह संख्या 17 पर पहुंच गई। 2008 से 2010 तक गणना हुई ही नहीं। 2011 में इनकी संख्या 14 रह गई। 2012 में यह आंकड़ा घटकर सात हो गया। लगातार बाघों की संख्या का इस तरह घटना बेहद खतरनाक संकेत देता रहा। पर वन विभाग के अधिकारी उदासीन बने रहे।





विभाग में नहीं है पोस्टमार्टम रिपोर्ट





31 बाघ कहां गए, इसका जवाब वन विभाग के पास नहीं है। उनकी स्वाभाविक मौत हो गई तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहां गई। विभाग में कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। यही सवाल शक उपजाता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इतने बाघ कभी थे ही नहीं। जब बाघ ही नहीं थे तो पोस्टमार्टम किसका होता।





फोटो ट्रैप ने किया पर्दाफाश





बिहार के कार्यकाल में बाघों की गणना का तरीका फुट प्रिंट्स के जरिए था। बाद में बाघों के मल के डीएनए टेस्ट को आधार बनाया गया। इस गणना को सीजेडए (सेंट्रल जू अथारिटी) ने नकार दिया। इसके बाद यहां फोटो ट्रेपिंग को आधार बनाया गया। जिन-जिन जलाशयों में बाघों की आने की संभावना होती है, वहां पर कैमरा लगा दिया गया। कैमरा लगने के बाद फर्जी आंकड़ा देना संभव नहीं है। यही कारण है कि बाघों की संख्या अचानक घट गई।





संख्या बढ़ाने के हो रहे प्रयास





मैं इस प्रोजेक्ट का डायरेक्टर रह चुका हूं। 2004 में 38 बाघ थे। अभी सात ही क्यों रह गए। इसका मैं पता लगा रहा हूं। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए हर प्रयास किए जा रहे हैं।



एके मल्होत्रा, पीसीसीएफ (वन्य प्राणी)





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