(फाइल फाेटो : बिबा ब्रांड की संस्थापक और चेयरमैन मीना बिन्द्रा)
नई दिल्ली। बड़े काम अचानक ही होते हैं। ऐसी ही कहानी महिलाओं के सलवार-कमीज़ ब्रांड- 'बिबा' की है। कंपनी की संस्थापक, अब चेयरमैन 72 वर्षीय मीना बिंद्रा ने कभी नहीं सोचा था कि लोन के 8 हजार रुपए से घर में खोला गया छोटा-सा बुटीक देखते-देखते 500 करोड़ रु. की कंपनी बन जाएगी। मीना कहती हैं- पति नेवी में थे। बच्चे बड़े हो चुके थे। काफी वक्त खाली बच जाता था। डिजाइनिंग का जुनून था, पर मेरे पास कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। एक दिन पति से कहा- कुछ करना चाहती हूं डिज़ाइनिंग में। पैसे चाहिए। जवाब आया- पैसे तो नहीं है। सिंडिकेट बैंक से लोन की बात करता हूं और अगले दिन 8 हजार रु. दे दिए। पांच या दस हजार रुपए का लोन क्यों नहीं लिया, इसका रहस्य आज भी नहीं जानती, लेकिन यह 8 हजार रुपए मेरे लिए बहुत लकी रहे।
घर के हिस्से को बनाया बुटीक
मीना के मुताबिक उन्हें कपड़े की समझ थी और ब्लॉक प्रिंटिंग का शौक भी। बस अब कोई चाहिए था, जो कटिंग, स्टिचिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग टेक्निक जानता हो। एक गुजराती लड़का मिला, जिसकी ब्लॉक प्रिंटिंग में गजब पकड़ थी। मेरे पति का हर दो साल में ट्रांसफर होता था, इसलिए मुंबई मेरे लिए बिल्कुल नया था। ज्यादा लोगों को जानती नहीं थी। जिस सरकारी फ्लैट में रहते थे, वो काफी बड़ा था। घर के एक हिस्से में बुटीक बना लिया। सभी कस्टमर मीना आंटी कहकर बुलाते, इसलिए बुटीक का कोई नाम रखा ही नहीं। अभी कुछ कस्टमर जुड़े ही थे कि पति का फिर ट्रांसफर हो गया। हमेशा पैसों की तंगी देखी थी, इसलिए अब खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। बच्चों के साथ मुंबई में रहने का फैसला किया। जितना कमाया था उससे छोटा-सा घर खरीदा। उस वक्त ज्यादा सलवार-कमीज़ ब्रांड नहीं थे। शीतल जैसे ब्रांड काफी वर्षों बाद आए थे। मेरे कलेक्शन को धीरे-धीरे पहचान मिलने लगी थी।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, कैसे मिला ब्रांड नेम...