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सरकार से लेकर सिस्टम तक सब पर भारी हैं ये दबंग पुलिसावालियां

असल जिंदगी में ऐसी पुलिसवालियां हैं जो दबंग तो हैं ही निडर भी हैं। इनके कारनामे किसी के भी होश उड़ा दें।

Danik Bhaskar | Sep 06, 2017, 02:48 PM IST

फिल्मी परदे पर हमने अभी तक 'सिंघम' से लेकर रॉबिनहुड पांडे तक बहुत सारे दबंग और बहादुर पुलिस वाले देखे हैं, लेकिन असल जिंदगी में ऐसी पुलिसवालियां हैं जो ना सिर्फ दबंग हैं बल्कि उनके कारनामे भी ऐसे हैं कि आप भी जानकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे।

भारत के दबंग से दबंग पुलिसवालों पर भी भारी पड़ती हैं ये बहादुर पुलिसवालियां -

संजुक्ता पाराशर एक मिसाइल हैं जिनके आगे अच्छे-अच्छे चित हो जाते हैं। बेहद कम वक्त में ही संजना पाराशर ने ऐसे ऐसे कारनामे किए हैं कि दुश्मन भी जानकर थर्रा उठेंगे। असम की इस आइपीएस अफसर के आगे आतंकी भी डर से पसीने-पसीने हो जाते हैं। असम में संजुक्ता ने एक ऑपरेशन के दौरान कई आतंकियों को मार गिराया था और करीब 64 बोडो आतंकवादियों को अरेस्ट भी करवाया।


संजुक्ता कितनी निडर और बहादुर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें आतंकवादियों ने कई बार जान से मारने की धमकी दी है, लेकिन मजाल है जो वो अपने इरादों से टस से मस हो गई हों।

केरल की सबसे कम उम्र की आइपीएस अफसर हैं मेरीन जोसेफ, लेकिन इस भोली-सी सूरत और खुशमिजाज चेहरे के पीछे एक ऐसी दबंग पुलिसवाली है जिसके कारनामे और हिम्मत दुश्मनों को चारों खाने चित कर देती है।
 
मात्र 25 साल की उम्र में ही मेरीन ने आइपीएस का पदभार संभाला।
अपने नाम की तरह सौम्या संबसिवन बेहद सौम्य हैं, लेकिन उनके इरादे कट्टर हैं। शिमला की पहली महिला आइपीएस अफसर सौम्या के काम का ना सिर्फ पूरा पुलिस डिपार्टमेंट कायल है बल्कि वहां के निवासी भी।

2010 में आइपीएस बैच से पास आउट सौम्या ने अपने कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में लगभग 6 मर्डर मिस्ट्री सुलझाईं। साथ ही वहां जो कुछ ड्रग माफिया सक्रिय थे उन्हें भी जेल पहुंचाया।
 
सौम्या की सबसे बड़ी खासियत ये है कि मुजरिम उनकी पकड़ से छूट भी नहीं पाता। वो तुरंत एक्शन लेती हैं।
और अब एक ऐसी दबंग और निडर पुलिसवाली के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिसने एक एमएलए को चांटा मार दिया था और ये तक नहीं सोचा कि उसका अंजाम क्या होगा।

अपने पिता से प्रभावित होकर आइपीएस बनीं सोनिया नारंग उस वक्त अचानक ही चर्चा में आ गईं थीं जब 2006 में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कुछ विरोध प्रदर्शन हुआ। स्थिति को कंट्रोल करने के लिए सोनिया नारंग को लाठी चार्ज तक करना पड़ा और जब एक बीजेपी एमएलए ने बात मानने से इंकार किया तो सोनिया नारंग ने उसे थप्पड़ जड़ दिया।
 
इसके अलावा सोनिया नारंग ने एक्सटोर्शन रैकेट का पर्दाफाश तक किया।
एक पुलिसवाली ऐसी भी है जो जम्मू और कश्मीर में लड़कियों को आइपीएस का एक्जाम देने के लिए भी प्रेरित करती है। ये हैं रुवेदा सलाम। रुवेदा सलाम तब सुर्खियों में आईं जब वो कश्मीर की पहली महिला आइपीएस बनीं।

देश के बाकी हिस्सों में रहने वाले लोगों को लगता है कि कश्मीर में रहने वाले लोगों की सोच और मानसिकता देश के खिलाफ होगी और रुवेदा इसी मानसिकता को बदलना चाहती हैं।
अब जिस पुलिसवाली के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उस पर बॉलीवुड में 'मर्दानी' नाम से फिल्म भी बनाई जा चुकी है। इस पुलिसवाली की हिम्मत और दिलेरी सभी के लिए मिसाल है।

ये हैं मीरा चड्ढा बोरवांकर जो अपनी तेज-तर्रार छवि के लिए जानी जाती हैं। अपने कार्यकाल के दौरान मीरा बोरवांकर ने महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों में गुंडाराज खत्म करवाया और सभी के लिए प्रेरणा बनीं।

2015 में जब याकूब मेमन को फांसी दी गई तो उस वक्त वो महाराष्ट्र की एडीजीपी (जेल) थीं। अपने अतुल्नीय काम के लिए मीरा बोरवांकर को 1997 में राष्ट्रपति मेडल से भी सम्मानित किया गया।
एक पेंटर की बेटी ने आइपीएस अधिकारी बनकर जो मिसाल पेश की वो अदभुत है, लेकिन उससे भी ज्यादा चौंकाने वाले हैं इस आइपीएस के तेवर। कविता कालिया एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं लेकिन खाकी प्रेम उन्हें आइपीएस में ले आया।

बेशक संगीता कालिया के इरादों पर लोगों को शक रहा हो, लेकिन वो खुद अपने इरादों से पीछे नहीं हटीं। वो उस वक्त सुर्खियों में आ गईं जब हरियाणा के फतेहाबाद में उनकी एक मंत्री के साथ बहस हो गई।
 
संगीता ने उस मंत्री के खिलाफ आवाज उठाई और उसके लिए उनकी काफी सराहना की गई।
नाम में ही पराजय के लिए जगह नहीं है तो फिर असल जिंदगी में अपराजिता कैसे हार झेल सकती हैं। अपराजिता राय...सिक्किम की पहली महिला आइपीएस और इरादे ऐसे कि बड़े-बड़े शेर भी ढेर हो जाएं।

तस्वीर में इस दबंग पुलिसवाली के तेवर भले ही नरम नजर आते हों, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। ऐसा कोई अवॉर्ड या सम्मान नहीं है जो अपराजिता राय ने अपने करियर में हासिल ना किया हो।
सुभासिनी संकरण...देश की पहली ऐसी महिला आइपीएस जिसे मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात किया गया था। 2014 में सुभासिनी ने अपनी बहादुरी का तब परिचय दिया जब नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के कुछ आतंकवादियों ने 
सोनितपुर जिले में करीब 30 ट्रायबल लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। सुभासिनी ने मात्र 20 मिनट के अंदर ही वहां पहुंचकर पूरी स्थिति संभाल ली।