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तो कपिल सिब्बल और उनके 98 वर्षीय पिता हीरालाल सिब्बल में इतना फर्क

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने बतायी अपने पिता के बारे में कई बातें।

Dainik Bhaskar

Jul 18, 2012, 12:05 AM IST
Kapil Sibal and his 98-year-old father Hiralal Sib
चंडीगढ़. मेरा पूरा परिवार आज साथ है और इस पल की खुशी को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अपना 98वां जन्मदिन मनाते हुए हीरालाल सिब्बल सचमुच बेहद खुश नजर आ रहे थे। अपने घर में बेटे-बहुओं, पोते-पोतियों के साथ यह सालगिरह मनाना उनके शब्दों में बहुत खास मौका है। केंद्र में मंत्री और बेटा कपिल सिब्बल खासतौर पर इस मौके पर मौजूद रहे। काबिलेजिक्र है कि चंडीगढ़ में हीरालाल सिब्बल अपने दूसरे बेटों जतिंदर सिब्बल और वीके सिब्बल के साथ रहते हैं। उम्र के इस मुकाम पर भी वह न सिर्फ पूरी तरह चुस्त और तंदुरुस्त दिखते हैं बल्कि अपने रुटीन को लेकर भी खासे सजग हैं। कपिल सिब्बल ने बताया, ‘इनका दिमाग आज भी बेहद अलर्ट है। जन्मदिन पर आप लोगों के आने से इनके जवानी के दिनों की याद ताजा हो गई। सभी का शुक्रिया करना चाहूंगा।’ अपने पिता की लंबी आयु और अच्छी सेहत के राज के सवाल पर कपिल बोले वह प्रतिदिन सैर, योग व प्राणायाम करते हैं। बेहद कम खाते हैं। हर रोज न्यूजपेपर पढ़ने के साथ-साथ डेढ़ से दो घंटे तक सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट भी पढ़ते हैं। देश की वर्तमान राजनीति की पूरी जानकारी रखते हैं और चर्चा करते हैं। इनकी याददाश्त कमाल की है। पुराने से पुराने केसों के जजों व गवाहों तक के नाम इन्हें आज भी याद हैं। हाल ही में इन्होंने अपनी ऑटो बायोग्राफी भी लिखी है। क्या कभी आपको भी सलाह देते हैं? इसके जवाब में कपिल ने बताया-बस इतना ही कहते हैं कि अपनी सेहत का ख्याल रखो। हीरालाल सिब्बल आजादी से पहले लाहौर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस किया करते थे। बाद में वह भारत आ गए और चंडीगढ़ में सेटल हुए। एक वरिष्ठ वकील के अलावा उन्हें लॉ के क्षेत्र में लिविंग लेजेंड का खिताब हासिल है। एक जमाने में उन्होंने मशहूर और विवादित लेखक सआदत हसन मंटो और इस्मत चुगताई के खिलाफ हुए मुकदमों की पैरवी भी की थी। उनके इस योगदान के चलते सोमवार को नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज और उर्दू आलमी ट्रस्ट ने उन्हें सम्मानित किया। इससे पहले मंटो फाउंडेशन भी उन्हें सम्मानित कर चुका है। इसी प्रोग्राम में हरियाणा उर्दू अकादमी के शम्स तबरेजी ने अकादमी की उर्दू की त्रैमासिक पत्रिका जमना तट के ताजा अंक का विमोचन हीरालाल सिब्बल से करवाया।
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