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भारत में स्क्वैश गेम अभी भी अधूरा : दीपिका पल्लीकल

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. स्किल, स्पीड और फिटनेस के बूते वर्ष 2011 की सबसे भारती की सबसे कामयाब महिला खिलाड़ी रहीं दीपिका का कहना है कि स्क्वैश का विकास आज तक पूरा नहीं हो सका है। इसके विकास के लिए अभी भी बहुत सा काम किया जाना बाकी है, जिसके बारे में कोई नहीं सोच रहा। दीपिका के अनुसार भारत में अभी तक सभी जगहों पर तो स्क्वैश की एसोसिएशन तक नहीं बनी है। मैं जब अपनी साथी जोशना चिनप्पा से मिली तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि विकासशील होने के कारण आपको अच्छा साथी बेहद मुश्किल से मिलता है। ओलिंपिक में देश के लिए न खेलना बेहद दुख की बात है, लेकिन अगर ये गेम ओलंपिक में होता तो हम अवश्य खेल रहे होते। इसके बावजूद मुझे खुशी है कि मैंने एशियन और कॉम्नवेल्थ गेम्स में बेहतर प्रदर्शन किया और देश को सम्मान भी दिलाया। मैंने आठ साल की उम्र में स्क्वैश के लिए देश और घर छोड़ कर विदेश का रुख किया, आज अपना ये निर्णय सही लगता है। 2011 की सबसे सफल महिला खिलाड़ी रहीं - दीपिका वर्ष 2011 में भारत की सबसे सफल खिलाड़ियों में सबसे आगे रहीं। इस मामले में उन्होंने सानिया मिर्जा और सानिया नेहवाल को भी पीछे छोड़ दिया था। वर्ष 2011 में दीपिका ने वल्र्ड में धूम मचाई, बल्कि अपनी ग्लैमरस छवि से खेल जगत को भी चौंकाया। भारत की शीर्ष वरीयता और विश्व की 15 नंबर की इस 20 वर्षीया चेन्नई बाला ने अपने खेल और ग्लैमर से सभी को चौंकाया। दीपिका इस समय पांच बार कि विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज खिलाड़ी साराह फिटज् से कोचिंग ले रहीं हैं। खेल के साथ पुराना नाता दीपिका पल्लीकल के अनुसार उनके पूरे परिवार का खेल से पुराना नाता रहा है। जहां दीपिका ने स्क्वैश में सफल होने के लिए खूब पसीना बहाया और वे बचपन से ही स्क्वैश में आगे ही आगे रहीं भारत में कम खेले जाने वाले स्क्वैश में करियर बनाने वाली दीपिका को परिवार ने भी पूरा साथ दिया। उनकी दादी ने एथलेटिक्स में केरल का प्रतिनिधत्व किया, उनके दादा तीन राज्यों की ओर से बास्केटबॉल खेले। दीपिका ने अपना पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट लंदन में खेला, जब वह महज 13 साल की थीं और सिर्फ कक्षा छह में पड़ती थीं। उसके बाद जूनियर लेवल पर कई खिताब जीते, जिसमें जर्मन ओपन, डच ओपन, फ्रेंच ओपन, ऑस्ट्रेलियन ओपन स्क्वैश टूर्नामेंट शामिल हैं। ओलंपिक में धमाल मचाएगा भारत-ओलिंपिक में स्क्वैश शामिल न होने के कारण निराश दीपिका का कहना है कि वे भले ही लंदन में धमाल मचाने न जा रहीं हों, लेकिन भारत वहां जरूर धमाल मचाएगा। दीपिका ने कहा कि मुझे सबसे ज्यादा उम्मीदें बैडमिंटन सनसनी सानिया नेहवाल से हैं, वहीं सानिया मिर्जा भी मेडल दिला सकती हैं। मेरे अनुसार लंदन ओलंपिक भारत के लिए यादगार रहेगा क्योंकि हर खिलाड़ी अपना 100 प्रतिशत देने को तैयार हैं।

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