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तोरवा में फैला डायरिया : पार्षद समेत 25 हुए बीमार, छह अस्पताल में भर्ती

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. तोरवा क्षेत्र के वार्ड-36 स्वामी विवेकानंद नगर में उल्टी-दस्त की शिकायत से लोग परेशान हैं। पिछले दो-तीन दिनों में डायरिया से 20-25 लोग प्रभावित हैं और इसका प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। वार्ड के पार्षद व उसके परिजन, एंग्लो इंडियन परिवार के दो सदस्यों सहित छह लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। डायरिया की वजह दूषित पेयजल की सप्लाई को माना जा रहा है। वजह पता लगाने के लिए नगर निगम के नल-जल विभाग ने सप्लाई किए जा रहे पानी का सैंपल टेस्ट करवाने के लिए पीएचई की लैब को भेजा है।

तोरवा में डायरिया ने पैर पसार दिए हैं। यहां अरपा पुल के नीचे बांयीं ओर सैकड़ों घरों में बोरिंग से पानी सप्लाई किया जाता है। पंप हाउस के पास ही रहने वाली अधेड़ उम्र की महिला रामप्यारी ने बताया कि दो दिनों से उसे और बहू दीपिका केंवट को उल्टी-दस्त की शिकायत है। मोहल्ले में और भी कई लोग बीमार हैं। पड़ोस में रहने वाले शिक्षक कमलेश दुबे (49 वर्ष) को श्रीराम केयर अस्पताल में, 45 वर्षीय सुखमत को सिम्स में, नीतू पांडे (15 वर्ष) को पेंडलवार क्लीनिक में और एंग्लो इंडियन परिवार से रॉड्रिक व उनके कर्मचारी को रेलवे अस्पताल में भर्ती किया गया है।
इस वार्ड के पार्षद तजम्मुल हक के मुताबिक, दो दिनों से वे खुद उल्टी-दस्त की शिकायत पर अपना इलाज करवा रहे हैं। उनके चाचा खलील हक को इलाज के लिए प्राइवेट क्लीनिक में भर्ती किया गया है। पार्षद के मुताबिक कई लोग इलाज करवाने के बाद घर लौट चुके हैं। जिन्हें आराम नहीं मिला है, वे अभी भी भर्ती हैं। डायरिया से प्रभावितों की संख्या करीब 25 बताई जा रही है।

अरपा में जमा नाले-नालियों का पानी तो वजह नहीं
तोरवा में जिस बोर से मोहल्ले के लोगों को पानी सप्लाई किया जाता है, वह अरपा के तट से बमुश्किल 100 मीटर दूर है। बोरिंग के पीछे रेलवे का वर्षों पुराना कुआं है। हुदहुद के अलर्ट के दौरान जल संसाधन विभाग ने अरपा डायवर्सन के गेट बंद कर दिए थे। इसके बाद अरपा के तटवर्ती तोरवा, राजकिशोर नगर इलाके में नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसमें शहरभर के 70 नाले-नालियों का गंदा पानी भी है।
पार्षद तजम्मुल हक ने आशंका जताई कि गेट बंद करने से जमा गंदे पानी से बोरिंग का पानी प्रभावित हो रहा है। इसके चलते लोगों को दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। रेलवे यार्ड को पानी सप्लाई के लिए बनाए गए पुराने कुएं में भी गंदा पानी जमा है। यह निगम की बोरिंग से बमुश्किल 10 फीट की दूरी पर है। आशंका है कि रेलवे के कुएं का गंदा पानी भी बोरिंग के पानी को प्रदूषित कर सकता है।
पानी के सैंपल लिए
लोगों को यह कन्फर्म नहीं है कि डायरिया गंदे पानी की सप्लाई से ही हो रहा है। निगम द्वारा पीएचई को भेजे गए सैंपल की जांच के बाद ही इसका खुलासा हो सकेगा। डायरिया की शिकायत मिलने के बाद नल-जल विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर अजय श्रीवासन ने टीम के साथ पानी सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन की जांच की। इसमें सब-कुछ ठीक ठाक मिला। सैंपल की टेस्ट रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि आखिर डायरिया की असली वजह क्या है?
पानी भी हो सकता है कारण
डायरिया के पीछे गंदे पानी की सप्लाई भी वजह हो सकती है। दो दिनों से निगम के हैल्थ डिपार्टमेंट की ओर से लोगों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर दवा दी जा रही है। इसके अलावा पानी साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं। लोगों को खान-पान में ऐहतियात बरतने के लिए कहा गया है।
-डाॅ. ओंकार शर्मा, हैल्थ आॅफिसर नगर निगम
(फोटो- वह बोर जिसका पानी प्रदूषित होने की आशंका है। पास है रेलवे का पुराना कुआं।)