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25 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी एक किताब नहीं तैयार करवा सके

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर। पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी को हर साल बुक राइटिंग पर सेमिनार करवाने यूजीसी से पांच लाख रुपए मिलते हैं। इसमें प्राध्यापकों को किताबें लिखने की ट्रेनिंग दी जाती है। अब तक हुए पांच सेमिनार पर 25 लाख रुपए खर्च किए चुके हैं। इसके बाद भी यूनिवर्सिटी एक किताब तक तैयार नहीं करवा सकी है। ऐसे में छात्रों को दूसरे संस्थानों की किताबों से पढ़ाई करवाई जा रही है।
दरअसल, इसका कॉन्सेप्ट यह है कि आेपन के स्टूडेंट्स को दीगर संस्थानों के बजाय अपनी यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों की लिखी स्तरीय किताबें पढ़ने को मिलें। यूनिवर्सिटी में नौ साल से पीजी में वर्धमान यूनिवर्सिटी राजस्थान और यूजी में हिंदी ग्रंथ अकादमी की किताबें चल रही हैं। छत्तीसगढ़ी कला-संस्कृति, भौगोलिक स्थिति और साहित्य का यहां के परीक्षार्थियों को ज्ञान ही नहीं हो पाता। यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक किताबें लिखते तो हरेक जिले की गतिविधियों, घटनाओं, स्थानीय कला-संस्कृति और हर विधा का समावेश हो पाता।
गौरतलब है कि यूजीसी सेमिनार के लिए सिर्फ अनुदान ही नहीं देता, बल्कि इसमें यह भी बताया जाता है कि पुस्तकें कैसे लिखें। जैसे किताब के दांयीं ओर अधिक जगह छोड़ी जाए, ताकि मार्किंग की जा सके। भाषा सरल हो और अंतिम पन्नों पर प्रश्नाेत्तरी के लिए जगह छोड़ी जाए। एक पेज या एक यूनिट पर परिश्रमिक कितना दें, बुक के कवर और साइज के बारे में जानकारी दी जाती है।
ऐसे पड़ रहा असर

डिस्टेंस एजुकेशन में गुणवत्ता का संबंध यूनिवर्सिटी की ओर से चलाए जा रहे कोर्स व किताबों से होता है। दूसरे राज्यों के प्रकाशन की किताबें कामचलाऊ होती हैं तो इनकी खरीदी पर लाखों खर्च करने पड़ रहे हैं। दूसरा, लाखों खर्च करने के बाद कितने प्राध्यापक एकेडमिशयन की तरह किताब लिख पाएंगे, इसका भी पता नहीं चलता।