डीबी स्टार| बिलासपुर
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तिफरामें हाईटेक बस स्टैंड पर पहुंचिए और चारों तरफ नजर डालिए, आपको ऐसी कोई रेट लिस्ट ढूंढ़ने से भी नजर नहीं आएगी, जिससे जानकारी मिल सके कि अमुक जगह के लिए बस का किराया इतना है। किसी बस के भीतर भी झांककर देख सकते हैं, सूची नदारद मिलेगी। इसी बात का फायदा उठा रहे हैं बस कंडक्टर। किस जगह का किराया कितना है, यह चेहरा देखकर तय होता है। शासन और आरटीओ के निर्देश के बाद भी बस में रेट लिस्ट नहीं लगाई जा रही है। यात्रियों की शिकायत के बाद भी संबंधित विभाग और जिमेदार अधिकारियों को कार्रवाई की फुर्सत नहीं है।
बिलासपुर से होकर रतनपुर, बेलतरा, पाली, चैतमा, दर्री, कोरबा, बालको, तखतपुर, मुंगेली, पंडरिया, कवर्धा, मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जरौंधा, सोन, जांजगीर-चांपा, कोरबा, सिमगा, रायपुर, अंबिकापुर, बस्तर के अलावा इलाहाबाद समेत कई अन्य राज्यों में आने-जाने के लिए छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 600 बसें चल रही हैं। इसमें से तखतपुर, मुंगेली, पंडरिया, पाली, चैतमा, कटघोरा, दर्री, बालको आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आज भी ट्रेन की सुविधा नहीं है। लिहाजा यहां के यात्रियों के आने-जाने के लिए बस ही एकमात्र सहारा है। बस के अलावा जीप या टाटा मैजिक जैसे वाहन भी अब विकल्प के तौर पर चलने शुरू हो गए हैं। इसके बाद भी बस ही सबसे सस्ता-सुलभ उपाय माना जाता है।
बसों में अवैध किराया वसूली से हलाकान यात्री