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फर्जी बिल मामले में कोरबा विधायक को झटका

6 वर्ष पहले
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कोरबाविधायक जय सिंह अग्रवाल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। डामर घोटाले समेत दो मामलों में कटघोरा और कोरबा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) ने एफआईआर दर्ज कर जांच करने और फाइनल रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। इस पर कटघोरा सेशन कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसी तरह के मामले में कोरबा जेएमएफसी कोर्ट के आदेश पर कोरबा सेशन कोर्ट ने रोक लगाई थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

ऐसे दो अलग-अलग मामलों में आरटीआई कार्यकर्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कटघोरा और कोरबा थाने में शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने जेएमएफसी कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत अर्जी पेश की। मजिस्ट्रेट ने इस धारा के तहत आदेश जारी करते हुए संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज करने, जांच करने और फाइनल रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ विधायक जय सिंह अग्रवाल ने कटघोरा और कोरबा सेशन कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका लगाई। कटघोरा एडीजे ने 24 अक्टूबर 2013 ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी। इसी तरह दूसरे मामले में कोरबा एडीजे ने 12 अगस्त 2014 को रोक लगा दी। इसके खिलाफ अमरनाथ अग्रवाल ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं (रिट पिटीशन क्रिमिनल) लगाई। इसमें कहा गया कि मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 156(3) के तहत जारी आदेश पर सेशन कोर्ट को रोक लगाने का अधिकार नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने सेशन कोर्ट के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया है।

भैसमा गांव में पीडब्ल्यूडी के सब-डिवीजन क्षेत्र में काम हुआ था। इसमें भी डामर का फर्जी बिल जमा किया गया। जेएमएफसी कोर्ट के आदेश पर जय सिंह अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सेशन कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।

कटघोरा के पसान में जय सिंह अग्रवाल की कंपनी ने सड़क बनाई थी। इसमें डामर का फर्जी बिल पेश किया गया था। मामले में शिकायत पर कार्रवाई नहीं हाेने पर कोर्ट में अर्जी लगाई गई। कोर्ट ने एफआईआर जांच के आदेश दिए।

विधायक पर 10 एफआईआर पहले से दर्ज

सेशनकोर्ट के दोनों आदेश रद्द होने के बाद कोरबा विधायक के खिलाफ फर्जीवाड़े के मामले में एफआईआर दर्ज होने का रास्ता खुल गया है। आरटीआई कार्यकर्ता अमरनाथ अग्रवाल ने बताया कि इसी तरह के अन्य मामलों में विधायक के खिलाफ पहले से 10 मामले दर्ज हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद बाद नई एफआईआर दर्ज की जाएगी।