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भौजाई का वोट लेने देवर काे किया था अगवा, पुलिस को चकमा देकर भाग निकला त्रिलोक
भाभीका वोट हासिल करने के लिए त्रिलोक श्रीवास ने उसके देवर का अपहरण किया था। पुलिस के दबाव में आकर बुधवार की देर रात उसने अपहृत ग्रामीण को छोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश दी, लेकिन वह भाग निकला। ग्रामीण को उसने अंबिकापुर के एक होटल में बंधक बनाकर रखा था।
पूर्व कांग्रेसी कोनी निवासी त्रिलोक श्रीवास ने 9 फरवरी को चकरभाठा क्षेत्र के जनपद सदस्य पूजा सिदार के देवर प्रकाशचंद सिदार को अपने साथियों की मदद से अगवा कर लिया था। यहां से उसे लेकर अंबिकापुर चला गया और एक होटल में बंधक बनाकर रखा। गुरुवार की रात पुलिस ने उस पर दबाव बनाया तो देर रात प्रकाशचंद को लाकर उसके गांव में छोड़ दिया। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह बच निकला। तड़के पुलिस ने उसके कोनी स्थित आवास पर भी दबिश दी। इस बार भी पकड़ में नहीं आया। चकरभाठा पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कोनी पुलिस की मदद मांगी थी। कोनी पुलिस ने मुखबिरी कर दी। पुलिस उसके घर के पास ही पहुंची थी, इसी बीच वह गाड़ी से भाग निकला। इधर, चकरभाठा पुलिस ने प्रकाशचंद्र का बयान दर्ज किया। उसने त्रिलोक पर आरोप लगाया कि वह अपनी प|ी स्मृति श्रीवास को बिल्हा का जनपद सदस्य बनाने के लिए उसकी भाभी का वोट हासिल करना चाहता था। इसलिए उसे अगवा कर ले गया था। त्रिलोक उसे छोड़ने के एवज में वोट का सौदा करना चाहता था। प्रकाशचंद के अनुसार उसे अंबिकापुर के एक होटल में बंधक बनाकर रखा गया था। कुछ अन्य लोगों को भी वह लेकर आया था। पुलिस ने प्रकाशचंद की दादी सूरज बाई की रिपोर्ट पर त्रिलोक के खिलाफ धारा 365, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया है। त्रिलोक के अलावा उसके साथी अनिल श्रीवास बीनू मिश्रा भी आरोपी बने हैं। तीनों ही प्रकाशचंद को गाड़ी में भरकर ले गए थे। प्रकाशचंद की भाभी पूजा सिदार सारधा की नवनिर्वाचित जनपद सदस्य है। त्रिलोक पर चुनाव के समय कोनी थाने में कालू सोनी ने केस दर्ज करवाया था। वहां भी उसके खिलाफ अपहरण का जुर्म दर्ज है।
फोन पर थानेदार को भी धमकाया था
एफआईआरदर्ज करने के बाद चकरभाठा टीआई एसएन शुक्ला ने त्रिलोक के मोबाइल पर काॅल किया था। तब त्रिलोक ने टीआई को भी केस दर्ज करने के लिए धमकाया था। उसने कहा था कि कोई भी कहे तो क्या पुलिस उसके खिलाफ केस दर्ज कर लेगी। टीआई ने बताया कि उसके घरवाले ही आरोप लगा रहे हैं। तब त्रिलोक ने प्रकाशचंद के अपने कब्जे में होने से इनकार करते हुए एक विधायक पर अपहरण की आशंका जता दी थी। टीआई ने उसे प्रकाशचंद को लेकर आने के लिए शाम तक का समय दिया था। इसके बाद भी वह नहीं आया।