भदौरा कांड: टीआई को मिली राहत
भदौराजमीन कांड की जांच करने वाले टीआई के खिलाफ जेएमएफसी कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने टीआई पर गंभीर टिप्पणी करते हुए जांच से अलग करने, सहआरोपी बनाने और गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में 9 याचिकाएं लगाई गई थी।
मस्तूरी क्षेत्र के भदौरा में करीब 58 एकड़ जमीन का घोटाला उजागर हुआ था। इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच मस्तूरी के तत्कालीन थानेदार आरपी तिवारी ने की थी। जेएमएफसी प्रभाकर ग्वाल की अदालत ने टीआई को विवेचना में लापरवाही और कुछ लोगों को बचाने का दोषी पाते हुए आदेश में उनके खिलाफ गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने उन्हें मामले से हटाने, सहआरोपी बनाने और गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। आदेश के बाद एसपी ने टीआई को सस्पेंड कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता बीपी सिंह के जरिए हाईकोर्ट में 9 याचिकाएं लगाई थी। हाईकोर्ट ने जेएमएफसी कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
ये है बहुचर्चित भदौरा जमीन घोटाला
मस्तूरीक्षेत्र के भदौरा में मार्च 2013 में 58 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का मामला उजागर हुआ था। प्रशासनिक अमले की मिलीभगत से हुए इस फर्जीवाड़े का भेद खुलने पर जांच की गई। पुलिस ने सरपंच-उप सरपंच, पटवारी सहित 33 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए। गांव के उप सरपंच नरेश सिंह उर्फ कल्लू, पटवारी फिरोज मेमन, जमीन दलाल रफीक खान विनोद सिंह समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने उप सरपंच नरेश सिंह उर्फ कल्लू, पटवारी फिरोज मेमन और जमीन दलाल रफीक खान को सात अलग-अलग मामलों में 3-3 साल सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं विनोद सिंह को एक मामले में तीन साल सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। रामफल सूर्यवंशी, मोहन दास, भागवत और मूलचंद खांडे को अदालत ने बरी कर दिया था।