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हालात नौ साल बाद भी नहीं सुधरे, प्रोफेशनल क्यों लेना चाहेंगे डिग्री
पं.सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी स्थापना के नौ साल बाद भी भरोसा कायम नहीं कर पाई है। जो हालात शुरुआती दौर में थे, उसमें कुछ हद तक सुधार हुए हैं लेकिन स्टडी सेंटरों के हालात अभी भी खराब हंै। यही वजह है कि यूनिवर्सिटी से प्रोफेशनल्स कोर्स करने से पहले बीसियों बार सोचते हैं। यूनिवर्सिटी की इमेज के चलते उन्हें यहां से कोर्स करने के बाद भी बहुत फायदा नहीं मिलता।
ओपन यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी। शुरुआत से विवादों से नाता जुड़ गया। कई साल तक एग्जाम नहीं होते रहे। होते भी थे तो रिजल्ट के लिए सालभर इंतजार करना पड़ता था। ऐसे हालात देख आम सोच बन गई कि यहां सबकुछ गड़बड़ है। ओपन यू्निवर्सिटी से कोई मार्कशीट या शिक्षा लेना नहीं चाहता था। दूसरे कुलपति डॉ. अवधराम चंद्राकर ने व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए भरसक कोशिश की, लेकिन फिर भी हालात पूरी तरह नहीं सुधरे। परीक्षाएं और रिजल्ट तो समय पर हो गए लेकिन मार्कशीट में ढेरों गलतियां हो रही हैं।
ये कदम उठाए जाएंगे तभी हो पाएगा सुधार
{यूजीसीके मापदंडों के अनुसार टीचिंग कोर्स लागू करें
{स्टडी सेंटर खुद के होने चाहिए
{यूनिवर्सिटी को खुद की पुस्तकें तैयार करनी होंगी
{सेटअप भी बढ़ाना होगा
{एग्जामिनेशन सिस्टम स्टडी सेंटरों की व्यवस्था में सुधार करना होगा
इनसे धूमिल हुई यूनिवर्सिटी की छवि, छात्र परेशान
{एग्जामिनेशनसिस्टम फेल
{खुद के परीक्षा केंद्र नहीं
{अाज भी नौ साल पहले का सेटअप, नए पद मंजूर नहीं हुए
{रोजगारमूलक कोर्स शुरू नहीं किए जा सके
{यूनिवर्सिटी का अपना कोई विजन नहीं
कुलपति डॉ. चंद्राकर के आने से सिस्टम खड़ा हुआ, लेकिन स्टडी सेंटरों के हाल बेहाल
ओपन यूनिवर्सिटी के प्रदेशभर में 150 से अधिक स्टडी सेंटर हैं। व्यवस्था सही नहीं होने के कारण 15 सेंटर बंद करने पड़े। पहले इन सेंटरों को गवर्नमेंट कॉलेजों में संचालित करने की योजना थी। कुछ सेंटरों को शिफ्ट किया गया, लेकिन योजना पूरी तरह कारगर नहीं हो सकी। अभी भी कई सेंटर जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग या अन्य विभागों से मिले एक-एक कमरे में चलाए जा रहे हैं।
आपके कार्यकाल में ओपन यूनिवर्सिटी में कोई नया कोर्स नहीं खुल पाया?
{कोर्सतो कई खुले हैं, लेकिन पढ़ने वालों की संख्या कम है।
अमलेकी कमी है, फिर भी नए पद मंजूर नहीं हुए?
{पहलेमैं