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सॉफ्टवेयर को लेकर अब शिकायत नहीं

7 वर्ष पहले
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सॉफ्टवेयर सपोर्ट नहीं कर रहा, कहीं 10, कहीं 12 क्विं. खरीदी

धानखरीदी शुरू हुए अभी महज 11 दिन ही गुजरे हैं और रोज नई-नई समस्याएं सिर उठा रही हैं। कभी कम खरीदी तो कभी किसानों को बारदाने नहीं देने की शिकायतें आम हो गई हैं। मुंगेली जिले के किसानों को धान बारदाने से खाली करने और पूरी तसल्ली होने के बाद ही खरीदी करने की बात कही जा रही है। इधर, कंप्यूटरों में ऑनलाइन एंट्री के लिए दिया गया साॅफ्टवेयर सपोर्ट नहीं कर रहा है। इससे प्रति किसान कहीं 10 तो कहीं 12 क्विंटल धान फीड हो गया है।

कल तक जो राज्य सरकार किसानों के धान का एक-एक दाना खरीदने का दावा कर रही थी, वह धान खरीदी को लेकर ही कटघरे में है। हालांकि खरीदी का कोटा प्रति एकड़ 10 से 15 क्विंटल कर दिया गया है, लेकिन अभी भी कई सोसाइटियों में साॅफ्टवेयर सपोर्ट नहीं करने की वजह से 10 या 12 क्विंटल ही धान खरीदा जा रहा है। ऐसी शिकायतें मुंगेली जिले से ज्यादा रही हैं। जानकारों के मुताबिक साॅफ्टवेयर में पहले से ही 10 क्विंटल का आंकड़ा फीड है, इसलिए एक बार में इससे ज्यादा धान खरीदना मुश्किल है। इसके लिए साॅफ्टवेयर में आंकड़े अपडेट करना बेहद जरूरी है। ऑनलाइन खरीदी की पोल तो शुरुआती दिनों में ही खुल चुकी है। शुरुआत के एक सप्ताह तक अधिकांश सोसाइटियों में ऑफलाइन ही खरीदी होती रही। ऑफलाइन खरीदी होने से गड़बड़ी की आशंका जहां बढ़ जाती है, वहीं ऑनलाइन खरीदी को ज्यादा सटीक माना जाता है। इससे तत्काल पता चल जाता है कि किस सोसाइटी में किस किसान से कितना क्विंटल धान खरीदा गया है और धान की कीमत कितनी है।

बिलासपुर में 39, मुंगेली में 14 करोड़ की खरीदी

बिलासपुरजिले में अब तक 39.65 करोड़ यानी 2 लाख, 87 हजार 727 क्विंटल धान खरीदा गया है। वहीं पड़ोसी जिले मुंगेली के जरहागांव, कोना, घुंडूकापा, बोईरपारा, देवरहट, औराबांधा , सुरेठा, बांधा, पीपरखुंटा, मसना, मसनी, बटहा, ठकरीकापा, बरेला सहित कई गांवों के किसानों से 1,02,813 क्विंटल धान खरीदा गया है, जिसकी कीमत 14 करोड़, 38 लाख, 88 हजार 584 रुपए है।

जरहागांव के पास छतौना सहित मुंगेली जिले के कई खरीदी केंद्रों में किसानों से धान इस शर्त पर खरीदा जा रहा है कि पहले वे धान लाकर केंद्र में खाली करें। पहले धान की क्वालिटी को लेकर केंद्र प्रभारी तसल्ली करेगा, फिर धान खरीदा जाएगा। किसानों के मुताबिक धान को बारदा