भुइंया के सिंगार ‘पेड़’
मनखे आज शुद्ध हवा के मिलना दूभर हो गेहे। जेती देखबे तेती चारो गुड़ा धुर्रा अउ मोटर गाड़ी के धुआं हर छाय हे। एहि मनखे के जिनगी बीतत हे। सबो डहर हरियर दिखै ते खेत खार अब बिलडर मन किसान मेर ले बिसाय लागिन। खाली जगा बडे़ बड़े अर्पाटमेंट अउ नावा नावा कालोनी बसाय जाथे। गांव घलो अब रुख राई के संध्या कम होगे काबर कि जेन गति से रुख के कटआ होथे गति से रुख ली लगाय जाथे। अब तो मुसकिल ये होगे कि गरुवा बछरु कां चराय जाय। गरमी हर बछार बाढ़ते जाथे। बरसा के दिन बरसा होवई कम होगे। अषाढ़ के महिना सुक्खा बीत जाथे। पानी नहीं गिरै। संतो रुख राईहर कुछु कुछु औषधि के काम आथे। फेर कोनो ओकर उपयोग नही करे। पहिली के मनखे बमरी अउ नीम के दतवन करै। आज घरो घर आनी बानी के टूथपेस्ट मिल जाही। तभे तो कदम कदम दांत के डाक्टर हो गईन। सियान मन सबो रुख राई देवता मानै। हमर पुरखा मन नीम बर पीपर आमा बेरा अंवरा अइसने कतेक रुख के पूजा करै। चार तेंदु लासा चिंरौजी जड़ी बूटी नहीं मिलथे। रुख राई बचाय खातिर सब्बो तरह से परचार करे जाही तभे रुख राई। बोचिहि संगवारी हो। आज स्टेट बैंक ग्रीन काउंटर चैनल सेपैसा जमा करवाना हर भी रुख राई बचाय केही परयास आय। अइसने इको बड़ी कांपी घलो लिखे रथे। आपने इस नोटबुक को खरीदकर एक वृक्ष को बचा लिया है। एकर मतलब हमन हमेशा इको फ्रेन्डली द्वारा बनाये उत्पाद ही उपयोग करना चाही। आज हवा को हवला पानी घलो हर सफा नहीं हे। कारखाना के छोड़े भइल अउ कुछ कुछु परब मूरति के बिसरजन से पानी घलो हर परदवबीत होगे हे। सड़क चौड़ीकरण करे खातिर कतको रुख खचाखच काट दिये जाथे। ओकर बदला ओत के कन रपुख जगाय सिरिफ कागज खानापूर्ति कर दिए जाथे। कुछ जिनिस होवै बिगाड़े हर कतका सस्सा लागथे अउ बनांय कतेक कठिन। तइसने रुख राई घलो हर जगय। काटे हर कतका जल्दी होथे। अउ एक छोटकन पौधा बड़े वृक्ष बने जरुर समय लागथे। तेला आय मन समझौ। रुख राई हर ही भुंइया के सिंगार आय।
धुर्रा-धुआं के बीच बीतत हे जिनगी