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मोर गुरु के इस्थान

6 वर्ष पहले
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फूलझाड़ू

कबिता

कइसे कहंव...?

बिरान होगे रे

छत्तीसगढ़ी गजल


काबर तू अंजान हय

दौड़के चली

दिल तोर बर कुरबान हय

उतर के तै देख जरा

दिल मया के खान हय

जेतका देबे ओतके बड़थे

कहिथे जेला ज्ञान हय

बखत के आघू हर घड़ी

बेबस हर इन्सान हय

वतन बर जीना अऊ मरना

आन, बान अऊ शान हय

मोर नजर से देख जरा

कण-कण भगवान हय

धड़कन दिल के कहिथे

मोर शायरी मोर जान हय

भगवान के इस्थान से पहिली

मोर गुरु के इस्थान हवय।।

{नरेंद्र यादव, जांजगीर

{कृत कुमार साहू, कुरमापाली, रायगढ़

{राजकुमार वर्मा, बंधवापारा सेंवार, बिल्हा

{मनोज कुमार पुराणे, मुंगेली

सतीश भोई, जूना बिलासपुर, बिलासपुर