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पार्किंग नहीं, भाजपा नेता का बार दो होटल सील

6 वर्ष पहले
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अमला कम, काम अधिक... नियमित नहीं चल सकती मुहिम

समस्याएं सुलझाने मुहिम छेड़कर भूल जाता है निगम... ऐसे में फिर लौट आता है पुराना ढर्रा

गांधीचौक पर बिना पार्किंग के चल रहे भाजपा नेता के बार और दो होटल मंगलवार को सील कर दिए गए। निगम के अमले ने यह कार्रवाई पुलिस बल की मदद से की। तीनों भवनों में पार्किंग के लिए कोई इंतजाम नहीं होने पर निगम के बिल्डिंग सेक्शन ने इनके संचालकों को नोटिस दिया था। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। होटल बार संचालकों ने कार्रवाई का विरोध किया और रसूखदारों से मोबाइल पर कॉल करवा कर कार्रवाई रोकने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने इनकी एक नहीं सुनी।

मुख्य मार्ग के होटल, बार और काॅम्प्लेक्स आदि में पार्किंग का इंतजाम नहीं होने से वाहन सड़क पर ही खड़े कर दिए जाते हैं। इससे बार-बार ट्रैफिक रुकने और जाम लगने से आम पब्लिक परेशान होती है। निगम प्रशासन ने ट्रैफिक दुरुस्त करने के लिए बगैर पार्किंग चलने वाले संस्थानों के खिलाफ बिना भेदभाव के कार्रवाई करने के संकेत दिए। गांधी चौक पर जिस टाॅप एंड टाउन बार काे सील किया गया, उसका लाइसेंस भाजपा नेता गुलशन ऋषि के नाम पर है। शेषपेज|20

वेभाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं। गुलशन ने बताया कि बार का लाइसेंस उनके नाम पर है, लेकिन इसका संचालन अमोलक सिंह भाटिया करते हैं। बिल्डिंग किराए पर ली गई है। निगम की ओर से उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है। कार्रवाई में निगम के कार्यपालन अभियंता वीके खेत्रपाल, पीके पंचायती, सौमित्र श्रीवास्तव, अतिक्रमण उन्मूलन दस्ते के प्रभारी प्रमिल शर्मा, संतोष वर्मा आदि शामिल थे।

और भी हैं बिना पार्किंग और नियमविरुद्ध निर्माण वाले काॅम्प्लेक्स

नगर निगम द्वारा बिना पार्किंग या नियमविरुद्ध निर्माण के मामले में मंगलवार को जिन स्थानों पर कार्रवाई की, उनसे लगी कई दुकानें, काॅम्प्लेक्स होटलों में भी नगर पालिक निगम अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है। तारबाहर के केजीएन काॅम्प्लेक्स के सामने श्यामा होटल, रसोई रेस्टोरेंट और केजीएन काॅम्प्लेक्स के दोनों ओर की दुकानों में पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं है। कुछ ने भवन से काफी दूर पार्किंग का बोर्ड लगा दिया है। इनके विरुद्ध नियमविरुद्ध निर्माण की शिकायत भी है, लेकिन पूरे शहर में जब-जब निगम की कार्रवाई हुई, अमला यहां तक पहुंचा ही नहीं। इसी तरह, पुराना हाईकोर्ट रोड, गांधी चौक और एक्सचेंज रोड के कई काॅम्प्लेक्स परमिशन पार्किंग इंतजाम के बिना चल रहे हैं।

मंगलवार को गांधी चौक पर बार सील करवाते नगर निगम के ईई।

कार्रवाई लगातार जारी रहेगी

^अवैध पार्किंग, अनुमति विरुद्ध निर्माण के मामलों में नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। ट्रैफिक की परेशानी दूर करने के लिए मेन रोड पर कार्रवाई करने के लिए बिल्डिंग सेक्शन, जोन प्रभारी दो कार्यपालन अभियंताओं वीके खेत्रपाल पीके पंचायती और निगम अमले के प्रभारी प्रमिल शर्मा को जिम्मा सौंपा गया है।\\\'\\\' -रानू साहू, कमिश्नर, नगर निगम

निगम अमले ने आज जिन होटल बार में सीलिंग की कार्रवाई की, उनमें टॉप एंड टाउन बार के अलावा केजीएन काॅम्प्लेक्स तारबाहर स्थित शिवा बार, तेलीपारा रोड पर बामलिया इलेक्ट्रिकल्स और पुराने बस स्टैंड रोड टेलीफोन एक्सचेंज के पास होटल जेबीइन शामिल हैं। तारबाहर केजीएन काॅम्प्लेक्स की सीलिंग के दौरान बार के मैनेजर का निगम अफसरों से काफी विवाद हुआ। इसी तरह होटल जेबीइन के संचालक जसपाल सेठी ने नक्शा दिखाते हुए होटल के बगल में जगह छोड़ने की जानकारी दी। बिल्डिंग अाॅफिसर वीके खेत्रपाल ने उन्हें निगम कार्यालय पहुंचकर कागजात पेश करने के लिए कहा। केजीएन काॅम्प्लेक्स बामलिया इलेक्ट्रिकल्स के संचालक फ्रंट पर नहीं आए। निगम की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अनुमति के विपरीत निर्माण पर तारबाहर चौक पर मोना अजीज के केजीएन होटल बार, गांधी चौक पर टाॅप एंड टाउन बार, तेलीपारा रोड पर बामलिया इलेक्ट्रिकल्स एक्सचेंज रोड के होटल जेबीइन को सील किया गया।

प्रमिल शर्मा, अतिक्रमण निवारण दस्ता प्रभारी

समाधान: डेयरी व्यवसाय सख्ती से शिफ्ट किया जाए

समाधान: नो पॉलिथीन जोन तय कर मुहिम छेड़ें

समाधान: डी-सीलिंग से पहले पार्किंग बनवाएं

मुहिम बंद, आवारा मवेशी फिर सड़क पर घूम रहे

नगरनिगम प्रशासन ने 20 जनवरी को तय किया था, आवारा मवेशी पकड़ने वाली टीम के साथ इंजीनियर भी जाएंगे, लेकिन कई तो दफ्तर से ही नहीं निकले। 21 22 जनवरी को तय कार्यक्रम के मुताबिक क्रमश: गोपाल ठाकुर, फरीद कुरैशी, कुमार लहरे एसके मानिक ने ड्यूटी दी। इस बीच कुल सिर्फ 26 आवारा मवेशी पकड़े गए। 23 जनवरी के बाद इंजीनियर अपने-अपने जोन में जुट गए। इसके बाद आवारा मवेशियों को पकड़ने की मुहिम दम तोड़ गई। सड़कों पर मवेशी फिर से नजर आने लगे।

पॉलिथीन जब्त करने की कार्रवाई िफर थम गई

1जनवरी 2015 को शासन ने पॉलिथीन पर बैन लगाया तो निगम और प्रशासन का जंबो अमला दुकानों, संस्थानों की जांच करने निकल पड़ा। दो-तीन दिनों के अंतराल में कार्रवाई कुछ दिन जैसे-तैसे चली, कुल-जमा 32 क्विंटल पॉलिथीन जब्त करने के बाद अमला फिर शांत पड़ गया। नतीजा, दुकानों में फिर से पॉलिथीन का जमा स्टॉक दोबारा चलन में गया है। चोरी-छिपे इसका प्रोडक्शन भी जारी है। पॉलिथीन के उत्पादन, बिक्री या इस्तेमाल पर निगम ने अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है।

पार्किंग पर बिजनेस, सड़क पर खड़ी हो रहीं गाड़ियां

नगरनिगम सात महीने में तीसरी बार अवैध पार्किंग को लेकर सख्त हुआ। मंगलवार को भारी-भरकम अमला कार्रवाई करने निकला। जुलाई 2014 में ऐसे भवनों पर ताबड़तोड़ कार्रवाइयां की गईं, जहां पार्किंग स्पेस पर बिजनेस चल रहा था। कुछ भवन सील किए, फिर कुछ दिन बाद डी-सील भी कर दिए। नवंबर 2014 में अमले की नींद फिर टूटी। चंद संस्थानों पर सीलिंग की गई। दरअसल, निगम अफसर भवन, कॉम्प्लेक्स मालिकों के खिलाफ नियमों का डंडा चलाने से बचते हैं। यही वजह है कि वे ढर्रे पर लौट आते हैं।

ट्रैफिक में बाधक बने ज्यादातर मवेशी आवारा नहीं हैं। इन्हें डेयरी संचालकों ने शहर में ही पाल रखा है। घुरू गांव में करोड़ों रुपए की लागत से बसाए गए गोकुल नगर में शहर के डेयरी व्यवसाय को पूरी तरह शिफ्ट करवाया जाए। ऐसा करने के बाद आवारा मवेशियों की समस्या खुद खुद हल हो जाएगी।

नगर निगम प्रशासन शहर के किसी एक प्रमुख बाजार को नो पॉलिथीन जोन घोषित कर यहां से सख्त मुहिम की शुरुआत करे। कारोबारियों पर सख्ती बरती जाए, ताकि वे पॉलिथीन का इस्तेमाल करें। लोगों में जागरूकता लाने के प्रयास किए जाएं। पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगने तक मुहिम कार्रवाई के लिए निगम राजस्व से अलग संयुक्त सेल बनाकर प्रभारी की नियुक्ति की जाए।

पार्किंग नियमों का पालन करने वाले भवन संचालकों के खिलाफ सख्ती बरती जाए। भवनों की सील तब तक खोली जाए, जब तक पार्किंग की जगह तय हो। हर भवन या कॉम्प्लेक्स के सामने सिक्याेरिटी गार्ड हो, जो वाहनों को निर्धारित स्थान पर पार्क करवाए। नगर निगम का एक अमला शहर में नियमित रूप से घूमकर पार्किंग इंतजामों की मॉनिटरिंग करे। पार्किंग स्पेस मिलने पर सख्त कार्रवाई करे।

निगम की मुहिम या शिविर सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं। सचमुच इनका फायदा मिले, इसके प्रयास किए जाते हैं?

{अतिक्रमणनिवारण दस्ता सौंपे जाने वाले काम को बेहतर ढंग से अंजाम देता रहा है। अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, सड़क पर डंप बिल्डिंग मटेरियल की जब्ती, बीच सड़क पर लगने वाले ठेले-दुकानों पर कार्रवाई इसमें शामिल है। लोगों को इसका तात्कालिक लाभ भी मिलता है। स्थाई समाधान के लिए नियमित मुहिम जरूरी है।

कोईभी मुहिम महज दो-चार दिनों में ही ठप क्यों और कैसे हो जाती है?

{अतिक्रमण उन्मूलन दस्ते के पास दो काऊकैचर और 30 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। नियमित स्टाफ सिर्फ दो हैं। वाहन कर्मचारी सीमित होने से एक ही दिन में कई अभियान एक साथ नहीं चल सकते। शासन के निर्देश के मुताबिक अलग मुहिम चलाई जाती है, जैसे पॉलिथीन जब्ती का अभियान आदि। नियमित मुहिम के लिए वाहन के साथ स्टाफ की जरूरत है।