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जेल में सिर्फ 36 घंटे गुजारे, नहीं मिलेगी पेंशन

6 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सिर्फ 36 घंटे जेल में गुजारने वाले 87 साल के बुजुर्ग को फ्रीडम फाइटर पेंशन स्कीम के तहत पेंशन का हकदार नहीं माना है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस सीबी वाजपेयी की बेंच ने कहा है कि बुजुर्ग इसी आधार पर राज्य शासन की योजना का लाभ ले रहे हैं, लिहाजा राज्य शासन की अनुशंसा के बावजूद उन्हें केंद्र की योजना का लाभ नहीं मिल सकता। दरअसल, सिंगल बेंच ने बुजुर्ग की याचिका मंजूर करते हुए पेंशन का पात्र माना था। केंद्र शासन ने इसके खिलाफ अपील की थी।

रायपुर की चौबे कॉलोनी में रहने वाले बृजलाल शर्मा 13-14 की उम्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। इसी दौरान 9 अगस्त 1942 को उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे 36 घंटों तक जेल में रहे। इसके बाद उनके लगातार सक्रिय रहने की वजह से 15 सितंबर 1942 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे अक्टूबर 1943 तक अंडरग्राउंड हो गए। इस दौरान वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रख्यात गांधीवादी केयूरभूषण, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, खूबचंद बघेल समेत कई प्रसिद्ध हस्तियों के संपर्क में रहे। केंद्र शासन ने 1980 में स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन स्कीम शुरू की। शर्मा ने भी इसके लिए अर्जी लगाई थी। केंद्र शासन ने 7 फरवरी 2000 को उनकी अर्जी नामंजूर कर दी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। सिंगल बेंच ने उनकी याचिका मंजूर की थी और उन्हें पेंशन का हकदार माना था। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को न्याय के लिए कोर्ट तक आना पड़ा। कोर्ट ने केंद्र शासन पर 10 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया था।

हाईकोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने अपील की। इसमें कहा गया कि इस योजना के तहत छह माह कैद का प्रावधान है, जबकि याचिकाकर्ता ने खुद स्वीकार किया था कि वे सिर्फ 36 घंटों तक ही जेल में रहे थे। इसके अलावा वे राज्य शासन की पेंशन योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस सीबी वाजपेयी की बेंच ने सुनवाई के बाद सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही कहा है कि याचिकाकर्ता एक ही आधार पर केंद्र और राज्य शासन की योजना का लाभ नहीं ले सकते।