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नसबंदी कांड: तीन माह में फंड जारी नहीं कर सकी है सरकार
नसबंदीकांड के तीन माह बाद सरकार प्रभावित महिलाओं और मां को खोने वाले बच्चों के लिए फंड जारी नहीं कर सकी है। यह खुलासा मंगलवार को हाईकोर्ट में पेश किए जवाब से हुआ। राज्य शासन की ओर से दिए गए जवाब में ऐसे कार्यों के बारे में बताया गया है, जो अभी किए जाने हैं। हाईकोर्ट ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कंप्लीट रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।
नसबंदी कांड की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इस पर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू की थी। कोर्ट ने केंद्र और राज्य शासन और एमसीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। शेषपेज|20
साथही दो वकीलों सलीम काजी और सुनीता जैन को न्याय मित्र नियुक्त किया गया था। मंगलवार को राज्य शासन की ओर से जवाब पेश किया गया। इसका विरोध करते हुए वकील सलीम काजी ने कहा कि घटना के तीन माह बाद भी सरकार की ओर से ऐसे कार्यों की जानकारियां दी जा रही हैं, जो अब तक हुए नहीं हैं, बल्कि करवाए जाने हैं। सरकार अभी बता रही है कि बच्चों का इलाज करवाया जाना है। प्रभावित परिवारों के लिए राशन कार्ड बनवाने हैं। जस्टिस टीपी शर्मा और जस्टिस सीबी वाजपेयी की बेंच ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए राज्य शासन को विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
ये है मामला
पेंडारीके नेमीचंद जैन हॉस्पिटल में 8 नवंबर को लगे नसबंदी ऑपरेशन शिविर में करीब 6 घंटों में 83 महिलाओं का ऑपरेशन हुआ। इन्हें कुछ घंटों बाद छुट्टी दे दी गई। महिलाओं को हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल, सिम्स अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। इनमें से 13 महिलाओं की मौत हो गई, कुछ अन्य लोगों की भी मौत हुई। प्रारंभिक जांच में सिप्रोसिन दवा में जहर की जानकारी मिली। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और सीएमएचओ के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही दवा बनाने वाली कंपनी और सप्लाई करने वाली कंपनी के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जांच जारी है।