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नसबंदी कांड: एक शपथ-पत्र के सहारे जांच करेगा न्यायिक आयोग

7 वर्ष पहले
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नसबंदीकांड की जांच के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग को शपथ-पत्र देने की अंतिम तारीख तक सिर्फ एक शपथ-पत्र मिला है। कोरबा की जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष ने शनिवार को शपथ-पत्र प्रस्तुत किया। वहीं सिप्रोसिन की वजह से मौत को लेकर भी एक शपथ-पत्र दिया गया है। हालांकि यह जांच के दायरे में नहीं है, लेकिन रिकॉर्ड के लिए आयोग ने इसे स्वीकार कर लिया है।

एक महीने पहले नसबंदी ऑपरेशन के लिए बिलासपुर के पेंडारी में कैंप लगाया गया था। यहां 83 महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन करने के बाद इसी दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। महिलाओं को सिप्रोसिन-500 और आई-ब्रूफेन 400 की टेबलेट्स दी गई थी। ऑपरेशन के दूसरे दिन से महिलाओं को जिला अस्पताल और सिम्स में भर्ती करवाया गया। गंभीर महिलाओं को अपोलो हॉस्पिटल रेफर किया गया। चार दिनों के भीतर यानी 14 नवंबर तक 13 महिलाओं की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर ऑपरेशन करने वाले डॉ. आरके गुप्ता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का जुर्म करते हुए 12 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है।

आयोग की कोर्ट में पिछले दिनों की तरह सोमवार को भी चहल-पहल नहीं रही।

सिप्रोसिन से मौत जांच के दायरे में नहीं

सिप्रोसिन-400और आई-ब्रूफेन 400 की जांच से स्पष्ट हो चुका है कि दवाएं जहरीली थीं। हाईकोर्ट में पेश किए जवाब में राज्य शासन ने सिर्फ 3 महिलाओं की मौत सैप्टीसीमिया से होने की जानकारी दी है। बाकी महिलाओं की मौत दूसरी वजहों से हुई। जाहिर है जहरीली दवाइयों के चलते ही 10 महिलाओं की जान गई। इधर, पांच अन्य ग्रामीणों की मौत सिप्रोसिन से होने की आशंका है। इन्हें इलाज के लिए भर्ती करवाया गया था। सिप्रोसिन को आयोग की जांच के दायरे में नहीं रखा गया है।

19 दिन बाद भी सिर्फ एक शपथ-पत्र

आयोगने शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के लिए 19 दिनों का समय दिया। इस बीच विधिक प्राधिकरण समिति को भी प्रभावित लोगों की मदद के लिए जोड़ा गया। इसके बावजूद अंतिम दिन तक सिर्फ एक महिला ने शपथ-पत्र प्रस्तुत किया। कोरबा जिले के सुराकछार निवासी और जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष धन बाई पति जनकदास ने शनिवार को शपथ-पत्र प्रस्तुत किया था।

दबाव बढ़ा तब बनाया न्यायिक आयोग

13महिलाओं की मौत की घटना से पूरे देश में हड़कंप मच गया। सीएम डॉ. रमन सिंह ने 9 नवंबर को मामले की जांच न्यायि