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बीयू को गोल्ड मैडल बनवाने नहीं मिल रहे डोनर

7 वर्ष पहले
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बिलासपुरयूनिवर्सिटी को मेधावी शोधार्थियों को दिए जाने वाले गोल्ड मैडल के लिए दानदाता नहीं मिल रहे हैं। इसके लिए कम से कम एक लाख रुपए देने पड़ेंगे। पूर्व में गोल्ड मैडल के लिए दान की राशि 5000 रुपए तय थी, लेकिन यह व्यवस्था 31 साल पुरानी थी। बीयू प्रशासन ने इसे संशोधित करते हुए दान की राशि बढ़ाते हुए दानदाताओं से आवेदन मंगवाए हैं।

स्थापना के दो साल बाद व्यवस्था पटरी पर लाने बीयू प्रशासन अब एकेडमिक फील्ड मजबूत करने जुटा गया है। एक ओर रिसर्च गाइड के लिए आवेदन मंगवा पीएचडी करवाने तैयारी शुरू हो गई है तो वहीं दूसरी ओर दीक्षांत समारोह में गोल्ड मैडल देने दानदाताओं से अर्जियां मंगवाई जा रही हैं। गोल्ड मैडल देने की परंपरा वर्ष 1985 में शुरू हुई जिसके लिए दानदाताओं से सिर्फ 5000 रुपए लिए जाते थे। तब से अब तक सोने की कीमत में कई गुना उछाल चुका है। यही वजह है कि बीयू ने संशोधन करते हुए दान की राशि 5000 से बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी से अलग होने पर बीयू को दानदाताओं की जो सूची मिली, उनमें सिर्फ 20 नाम हैं। इनमें से कई 20 से 25 साल पहले रिटायर्ड हो चुके अधिकारी भी हैं। ऐसे में अब आवेदन लेने की कवायद शुरू की गई है।

नए सत्र से शुरू होगी पीएचडी

बीयूमें पीएचडी की तैयारी शुरू हो गई है। सबसे पहले रिसर्च गाइड तय करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रोफेसर 8 स्टूडेंट्स, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 को रिसर्च करवा सकेंगे। यूनिवर्सिटी की याेजना इसके लिए जनवरी में प्रवेश परीक्षा करवाने की है। इसके बाद नए सत्र से पीएचडी का कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।