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अब जागा प्रशासन, संभागायुक्त ने कहा- एक महीने में शुरू करें नई एनआईसीयू
सिम्सकी एनआईसीयू में मंगलवार को एक और मासूम की मौत हो गई। इधर, नौ दिनों में 16 मासूमों की मौत के बाद जिला प्रशासन जागा। संभागायुक्त सोनमणि बोरा मंगलवार की दोपहर सिम्स के एनआईसीयू पहुंचे। 12 बच्चों को रखने की व्यवस्था वाले कमरे में 27 बच्चों को देखकर नाराजगी जताई। प्रबंधन की व्यवस्था पर कहा कि तत्काल नई एनआईसीयू तैयार करवाएं। इस बीच डाॅक्टरों ने अन्य अस्पतालों में होने वाली बच्चों की मौत के आंकड़े बताना चाहा तो बोले, आप यहां मासूमों को बचाने क्या कर रहे हैं, ये बताएं।
संभागायुक्त बोरा दोपहर 2.30 बजे सिम्स पहुंचे। सिम्स के अधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति अन्य स्टाफ के साथ शिशु वार्ड पहुंचे। मास्क और कवर लगाकर वे जैसे ही एनआईसीयू में गए, नजारा देख चौंक गए। एक छोटे से कमरे में 27 मासूम अलग-अलग बेड और वाॅर्मर में रखे गए थे। वहां पर सिर्फ 12 वाॅर्मर में बच्चे थे, बाकी 15 बेड पर सुलाए गए थे। यहां डॉक्टरों से पूछताछ की। वार्ड देखने के बाद सभी नए एनआईसीयू में पहुंचे। इसके बाद अफसरों की बैठक ली। इस बीच आईजी पवन देव, कलेक्टर सिद्धार्थ काेमल सिंह परदेशी, एसपी बीएन मीणा भी पहुंच गए। प्रबंधन की ओर से डीन डाॅ. एसके मोहंती, अधीक्षक डाॅ. रमणेश मूर्ति, शिशु विभाग के एचओडी डाॅ. हेमंत कुमार शामिल थे। संभागायुक्त बोरा बोले- छोटे से कमरे में इस तरह बच्चों को रखा गया है। नया कमरा तैयार है तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा। डीन डाॅ. मोहंती अन्य डाॅक्टरों ने रायपुर के एम्स और अंबेडकर अस्पताल में बच्चों की मौतों हवाला देते हुए बचाव की कोशिश की। इस पर बोरा बोले, किसी और अस्पताल के आंकड़े गिनाएं, यह बताइए कि बच्चों को सुरक्षित रखने क्या कर रहे हैं? यहां का इंतजाम पहले देखें, बाद में कहीं और की बात करिए।
मौतों के बाद अब दे रहे इन पर ध्यान
{एनआईसीयू में स्टॉफ नर्स तत्काल बढ़ाई जाएं। प्रत्येक चार बच्चों पर एक अनुभवी नर्स रखी जाएगी।
{ फोटो थैरेपी मशीन और मोबाइल एक्स-रे मशीन लगवाई जाएगी।
{ संक्रमण हो, इसके लिए शिशु वार्ड की साफ-सफाई पर ध्यान दें।
{ महतारी एक्सप्रेस और 108 वाहन में मरीजों के लिए कंबल और गरम पानी की रबर वाली थैली रखें। ज्यादातर मामले गौरेला-पेंड्रा या फिर जंगल के क्षेत्र से रहे हैं। वहां से आने में 3 घंटे से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में जच्चा और बच्चा को ठंड से बचाने