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रिमोट एरिया में एनआईटी, सीयू तो खोले, पर क्वाॅलिटी एजुकेशन नहीं

7 वर्ष पहले
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जनप्रतिनिधिएनआईटी, आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी खुलवा तो लेते हैं लेकिन इनमें क्वाॅलिटी एजुकेशन दिलाने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। इसके बाद इन संस्थानों की ऑटोनॉमी यानी स्वायत्ता का मसला है। शुरू होने के कुछ सालाें बाद ही अधिकतर की आर्थिक स्थिति खराब होने लगती है, इसका स्थायी हल भी जरूरी है। एक और अहम मसला है, हमारे देसी संस्थान पैमानों के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां और कितने टिक पाते हैं। ऐसे तमाम ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर बिलासपुर यूनिवर्सिटी में होने वाले कुलपति सम्मेलन में चर्चा होगी।

शहर के टॉप स्कूलों के प्रतिभावान बच्चे आज भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं लेते। अभिभावक उन्हें पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरू जैसे महानगर में हायर एजुकेशन के लिए भेजते हैं। यही हाल टेक्नीकल और मेडिकल एजुकेशन के संस्थानों का है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में एनआईटी, गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी और एम्स खोले जा चुके हैं, लेकिन खुलने के बाद से अब तक वह क्वाॅलिटी सकी, जिसकी उम्मीद है। इनकी मॉनिटरिंग करने वाले संस्थान इनोवेशन की बात करते हैं, लेकिन पुराने ढांचे को मजबूत करने की गंभीरता नहीं दिखाते।

शिक्षा का स्तर लगातार गिरने की वजहें

1. उच्चशिक्षा में रिवाइज्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, स्किल डेवलपमेंट, कॉलेजों में सेमेस्टर कोर्स आदि व्यवस्थाएं लागू हो रही हैं, लेकिन इसके लिए न्यूनतम सुविधाएं कॉलेजों में नहीं हैं।

2.विभागोंमें न्यूनतम फैकल्टी नहीं है। वे सुविधाविहीन इलाकों में जाना भी नहीं चाहते।

3.पर्याप्तफंडिग नहीं हो रही है, जिसके कारण रिसर्च तेज गति से नहीं हो पा रही है।

4.इंफ्रास्ट्रक्चरपर ध्यान नहीं दिया जाता है। आने-जाने की सुविधा भी नहीं।

5.संस्थाके विभिन्न विभागों में दी जाने वाली सुविधाओं में असमानता।

6.अफसर,प्राध्यापक हों या कर्मचारी, तकरीबन सभी संस्थानों में सेटअप के मुकाबले अमला आधा है।

क्वाॅलिटी एजुकेशन को बढ़ावा मिलेगा

1. विभागवारमिनिमम स्टैंडर्ड तय हो। एक डिपार्टमेंट में फैकल्टी, फैसिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर सभी हों।

2.विभागोंको दी गई सहूलियतों में असमानता हो। स्मार्ट क्लास अन्य सुविधाएं हों।

3.यूजीसीएमएचआरडी को प्रपोजल भेजते समय सभी विभागों की सहभागिता हो। पारदर्शिता रखी जाए।

4.सुविधाएंदेने के बाद नैक का ग्रेडेशन भी या प्लस होना