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ज्वॉइंट कलेक्टर को जमानत नहीं मिली

7 वर्ष पहले
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सातसाल पहले बिलासपुर में जमीन की अवैध प्लॉटिंग का मामला रफा-दफा करने के आरोपी बलौदा बाजार के संयुक्त कलेक्टर और तत्कालीन बिलासपुर एसडीएम संतोष देवांगन की जमानत अर्जी विशेष अदालत ने खारिज कर दी। उन्हें शनिवार को बलौदा बाजार के सरकारी निवास से गिरफ्तार करने के बाद 15 दिनों की रिमांड पर जेल भेजा गया था।

सरकंडा के बिल्डर चितपाल वालिया ने वर्ष 2007 में बिना सरकारी अनुमति के जमीन प्लॉटिंग कर बेच दी थी। इसकी शिकायत बिलासपुर के तत्कालीन एसडीएम संतोष देवांगन से की गई। एसडीएम ने बिल्डर पर मामूली पेनाल्टी लगाई। कुछ दिन बाद बिल्डर से सांठ-गांठ कर देवांगन ने अपने ही आदेश को पलटते हुए प्लॉटिंग को सही बता दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मामले में 10 से 12 लाख रुपए के लेन-देन की गई है। सरकंडा के कमलेश शुक्ला ने इसकी शिकायत लोक आयोग से की। जांच में मामला सही निकला। लोक आयोग की अनुशंसा के बाद एसीबी ने 2010 में देवांगन के खिलाफ धारा 13-1डी, 13-2 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 सहपठित धारा 420, 467, 468, 120बी के तहत जुर्म दर्ज कर राज्य सरकार के पास अभियोजन के लिए भेजा था। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर शुक्ला ने दोबारा लोक आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद एसीबी की टीम ने शनिवार को देवांगन को बलौदा बाजार स्थित उनके सरकारी निवास से गिरफ्तार किया था। उन्हें इसी दिन अदालत में पेश किया गया था। यहां से 15 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया गया था। आरोपी अफसर ने विशेष अदालत में जमानत अर्जी लगाई थी। एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता केएल अग्रवाल ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी अधिकारी की वजह से शासन को राजस्व की हानि हुई है। पूरी तरह जांच के बाद आरोप दर्ज कर कार्रवाई की गई है। मामले की गंभीरता के आधार पर विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंेद्र प्रधान ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।