पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अग्रिम जमानत: आरोपी की मौजूदगी जरूरी नहीं

अग्रिम जमानत: आरोपी की मौजूदगी जरूरी नहीं

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हाईकोर्टके जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच ने एक अहम आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत की अर्जी पर अंतिम सुनवाई के दौरान आरोपियों का कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। दरअसल, बेमेतरा के जज ने प|ी, ससुर समेत अन्य के खिलाफ रायपुर में घर में घुसकर मार-पीट करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगाई गई अग्रिम जमानत अर्जी पर एडीजे की कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के दौरान उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

बेमेतरा में पदस्थ सिविल जज क्लास-1 अविनाश त्रिपाठी ने ससुर बालमुकुंद दुबे समेत प|ी, सास, साली और साले के खिलाफ घर में घुसकर मार-पीट करने समेत अन्य आरोप लगाते हुए रायपुर के सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 294, 506, 323, 452, 392/34और 342 के तहत मामला दर्ज कर लिया। सभी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए रायपुर कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी लगाई। शेषपेज|17

मामलालंबित रहने के दौरान सरकारी वकील ने सीआरपीसी की धारा 438 में संशोधन के बाद उप धारा 1बी जोड़ने का हवाला देते हुए कहा कि अर्जी पर अंतिम सुनवाई के दौरान आरोपियों की कोर्ट में मौजूदगी अनिवार्य है। तर्क से सहमत होते हुए रायपुर के सेकेंड एडीजे ने 13 अक्टूबर 2014 को आदेश दिया। इसमें 17 अक्टूबर 2014 को सुनवाई के दौरान आरोपियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। दुबे समेत अन्य ने इस आदेश को अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सीआरपीसी में 23 जून 2005 को संशोधन कर नया नियम जोड़ा गया है, लेकिन इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। ऐसे में संशोधन प्रभावशील नहीं हुआ है। इस नियम के तहत अग्रिम जमानत अर्जी पर अंतिम सुनवाई के दौरान उपस्थिति का आदेश गलत है।

एडीजे का आदेश रद्द, न्यायिक जांच के लिए लगा सकेंगे याचिका

हाईकोर्ट ने संदीप कुमार बाफना विरुद्ध महाराष्ट्र शासन एवं अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला देते हुए एडीजे के आदेश को रद्द कर दिया है। इसमें अग्रिम जमानत अर्जी पर अंतिम सुनवाई के दौरान आरोपी को उपस्थित रहने के लिए कहा गया था। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने वाले जज के खिलाफ न्या