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सीयू में अब तक नहीं हो सकी सीवीओ की नियुक्ति
भ्रष्टाचारसिर्फ राज्य या केंद्र के विभागों में नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी में होता है। यही कारण है कि वर्ष 2012 में यूजीसी ने देशभर की यूनिवर्सिटीज को चीफ विजिलेंस ऑफिसर की नियुक्ति करने का निर्देश जारी किया था। दो साल बाद भी गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति क्यों नहीं हो सकी। इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने के सालों बाद केंद्र शासन ने चांसलर की नियुक्ति की थी। इसके चलते सीयू प्रबंधन की शिकायत का एकमात्र विकल्प कुलापधिपति यानी राष्ट्रपति थे।
यूनिवर्सिटीज में भी भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नियुक्तियों और खरीदी पर भ्रष्टाचार हो रहे हैं। स्टेट यूनिवर्सिटी पर फिर भी कंट्रोलिंग के लिए राज्य शासन हैं लेकिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ऐसे मामलें एमएचआरडी और यूजीसी तक कम पहुंच पाते है। एमएचआरडी और यूजीसी के सामने देश भर की यूनिवर्सिटी का दायरा होता है। इसलिए ऐसे मामलों में पड़ताल और कार्रवाई भी देर से हो पाती है। इन बातों को गंभीर मानते हुए यूजीसी ने देश की सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दो साल पहले चीफ विजिलेंस ऑफिसर की स्थाई नियुक्ति करने का निर्देश जारी किया था। निर्देश से साफ था कि यूजीसी यूनिवर्सिटीज में फैले भ्रष्टाचार पर तटस्थ जांच के साथ तत्काल कार्रवाई भी कराना चाहती थी। ताकि कामों में पारदर्शिता गुणवत्ता सके। अक्सर यूनिवर्सिटीज यूजीसी के निर्देश को बंधनकारी नहीं है, कहकर टाल देती हैं। चीफ विजिलेंस ऑफिसर की नियुक्ति के साथ भी ऐसा किया गया। सीयू में जरूरत नहीं है या बंधनकारी नहीं है कहकर टाल दिया गया। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पिछले पांच सालों में हुर्ह खरीदी और नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में इस पद को भी किनारे करने से इस संदेह को बल मिला है कि गड़बड़ी बड़े स्तर पर हुई है।
नियुक्ति पर सीयू गंभीर
यूजीसीका निर्देश दो साल पहले आया था। तब इस पद नियुक्ति क्यों नहीं की गई यह मेरी जानकारी में नहीं है। अब इस पद पर नियुक्ति के लिए सीयू गंभीर है। आने वाले समय में इसकी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।\\\'\\\' एचएनचौबे, प्रभारीरजिस्ट्रार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी
पिछले कार्यकाल के भुगतान पर हो रही समीक्षा
कुलपतिप्रो एसपी सिंह ने कार्यकाल संभालते हुए पिछले कार्यकाल में हुए कामों के एवज में भुगतान