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पहले डीलर अफसर, फिर धनाढ्य वर्ग को सब्सिडी लेने के लिए प्रेरित कर रही सरकार

7 वर्ष पहले
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कैशसब्सिडी स्कीम में सरकार पहले गैस कंपनियों, डीलर्स एलपीजी अफसर फिर धनाढ्य वर्ग को सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने की आदत छोड़ने के लिए प्रेरित करने लगी है। इसके लिए एजेंसियों में फॉर्म-5 मिल रहा है, लेकिन कोई इसे लेने तैयार नहीं है। आम उपभोक्ताओं के पहले कंपनियां चाहती हैं कि राज्य के 250 डीलर पहले गैस सब्सिडी लेना बंद करें, लेकिन वे भी पहल नहीं कर रहे हैं। ऐसा कर सरकार लाखों रुपए की सब्सिडी बचा सकेगी।

केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के 18 लाख उपभोक्ताओं को हर महीने 90 से 100 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी दे रही है। अन्य राज्यों को शामिल करने पर सब्सिडी का आंकड़ा अरबों रुपए होता है। शासन ने पहले प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाते खुलवाने का अभियान छेड़ा था। अब नए साल में 1 जनवरी से उन सभी एलपीजी उपभोक्ताओं के खाते में गैस सब्सिडी की रकम जमा करने की शुरुआत की जा रही है, जो 31 दिसंबर के पहले एमडीबीटीएल का फॉर्म एजेंसी बैंक में जमा कर अपना आधार नंबर या एकाउंट नंबर गैस नंबर से लिंक करवा लेंगे। जानकार कह रहे हैं कि इस योजना का उद्देश्य गैस की कालाबाजारी रोकने के साथ सब्सिडी घटाना भी है। इसी दिशा में पहल करते हुए फॉर्म-1, 2, 3 4 के बाद फॉर्म-5 जारी किया गया है। फॉर्म-5 ऐसे लोगों को भरकर जमा करना है, जो सरकारी धन बचाने सब्सिडाइज्ड सिलेंडर नहीं लेना चाहते हैं। दो महीने पहले गैस डीलर ऑयल कंपनी के अधिकारियों को पत्र भेजा गया, जिसमें कहा गया कि वे सब्सिडी वाले सिलेंडर लेना छोड़ दें ताकि पॉलिटीशियन, ब्यूरोक्रेटस, बिजनेसमैन और नागरिक भी प्रेरित हों। इससे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। पत्र के अलावा वाॅट्सएप पर मिनिस्ट्री के आदेश का मैसेज वायरल हुआ। हालांकि इस पर तो डीलरों ने ध्यान दिया और ही एलपीजी कंपनियों के अफसरों ने। अब फॉर्म-5 जारी कर उपभोक्ताओं को भी इसे भरने के लिए प्रेरित करने की बात कही जा रही है।

गैस कंपनियों के दफ्तर में एमडीबीटीएल का फाॅर्म जमा करवाने के लिए लोग दिनभर लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं।

सक्षम लोगों को आगे आकर पहल करनी चाहिए

शासनकी योजना मुझे अच्छी लगी, और मैंने सब्सिडी लेना बंद कर दिया है। इसमें डीलर और कंपनियों के अधिकारी-कर्मचारी ही नहीं, अमीर पॉलिटीशियन, ब्यूरोक्रेट्स, बिजनेस मैन हर उस आदमी को सामने आना चाहिए जो सक्षम हैं। वे महीने के 500 रुपए छोड़ ही सकते हैं।\\\'\\\'