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आयुर्वेद कॉलेज की फाइल कलेक्टोरेट में अटकी, इसी के चलते आठ महीने से किराया नहीं दे पाए
शासकीयआयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय, डीपी विप्र लॉ काॅलेज प्रबंधन के किराए के भवन में चल रहा है। 19 जून 2014 को 11 महीने का काॅन्ट्रैक्ट किया गया था। प्रबंधन को हर महीने कलेक्टर रेट से किराया मिलना था, लेकिन आठ महीने से फाइल कलेक्टोरेट में अटकी है। ऐसे में किराया ही फिक्स नहीं हो पा रहा है। इधर, आयुर्वेद काॅलेज प्रशासन ने सेकेंड ईयर की मान्यता के लिए डीपी विप्र लॉ कालेज प्रबंधन से अतिरिक्त कमरे बनवा देने कहा, जिस पर प्रबंधन ने पिछला किराया चुकाने की शर्त रखी। तय किया कि अब जो भी भवन दिया जाएगा, उसका किराया कलेक्टर रेट नहीं होगा। ऐसे में आयुर्वेद कॉलेज प्रशासन को समझ नहीं रहा है कि वह क्या करे।
आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में सेकेंड ईयर की मान्यता के लिए सीसीआईएम टीम का दौरा होने वाला है। इसके मद्देनजर कॉलेज प्रशासन तैयारी में जुटा है। बड़ी समस्या सेकेंड ईयर क्लासरूम के लिए अतिरिक्त कमरों की है। डीपी विप्र लॉ काॅलेज ने इस बार शर्त रखी है कि पहले पुराना किराया चुकता हो, तब नया भवन उपलब्ध करवाया जाएगा, उसका रेट कलेक्टर नहीं प्रबंधन तय करेगा। अभी आयुर्वेद काॅलेज को 3586 वर्गफीट ग्राउंड फ्लोर और उतनी ही जगह फर्स्ट फ्लोर पर दी गई है। इस तरह कुल कर 7172 वर्गफीट है। नए भवन के काॅन्ट्रैक्ट के लिए डीपी विप्र प्रबंधन फर्स्ट फ्लोर पर 3500 वर्गफीट में और भवन बनाकर देने को तैयार है, लेकिन किराया 12 रुपए प्रति वर्गफीट निर्धारित होगा। इस पर आयुर्वेद कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि कलेक्टोरेट दर पर किराए का भवन लेना, उनके लिए संभव नहीं। लिहाजा, नया भवन बनाकर देने का प्लान अटक गया है। सीसीआईएम टीम को अगर यह कहा गया है कि भविष्य में क्लासरूम और लैब बनाने का प्लान है तो उसका ड्राॅइंग डिजाइन भी दिखाना होगा। किराए का विवाद होने से आयुर्वेद कॉलेज को डीपी विप्र कॉलेज संस्थान से तो आश्वासन मिल रहा है और ही प्लान।
शासकीय आयुर्वेद कॉलेज डीपी विप्र लॉ कॉलेज से मिले किराए के भवन में चल रहा है। अब कॉलेज को सेकेंड ईयर की मान्यता के लिए अतिरिक्त कमरों की जरूरत है।
कलेक्टर दर पर काेई भवन देने को तैयार नहीं
^किराएका इश्यू सॉल्व हो जाएगा। जितनी जगह है, उसी में सेकेंड ईयर की क्लास एडजस्ट कर रहे हैं। पांच वर्षीय बीएएमएस कोर्स के लिए भवन ढूंढ़ रहे हैं, मगर कलेक्टर रेट पर कोई देने को तैयार नहीं। सेपरेट भवन निर्माण की बात है, तो शासन स्तर पर प्रयास जारी हैं। नूतन चौक पर अस्पताल भवन के पीछे करीब 1 करोड़ की लागत से अतिरिक्त 30 बिस्तर अस्पताल बनना है, पैसे स्वीकृत होते ही काम शुरू हो जाएगा। -डॉ. निखिल रंजन नायक, प्राचार्य और सुपरिटेंडेंट, शासकीय आयुर्वेद कॉलेज
मुख्यमंत्री के कहने पर दिया गया भवन
^मुख्यमंत्रीडॉ. रमन सिंह के अनुरोध पर समिति ने कॉलेज का भवन आयुर्वेद महाविद्यालय को किराए पर दिया था। इसके लिए 11 महीने का काॅन्ट्रैक्ट किया गया था। अब इसे आगे बढ़ाना है या नहीं, यह कमेटी तय करेगी। -अनुराग शुक्ला, चेयरमैन, डीपी विप्र लॉ कॉलेज प्रबंधन समिति
डीपी विप्र लॉ कालेज प्राचार्य के मुताबिक सीसीआईएम टीम आयुर्वेद काॅलेज का निरीक्षण करने वाली थी, ऐसे में काॅन्ट्रैक्ट हड़बड़ी में हुआ। तब कहा गया था कि कलेक्टर दर से किराए का भुगतान होगा। इसके बाद किराया तय ही नहीं हो पाया। फाइल कलेक्टोरेट में अटकी है। फरवरी में मामला नहीं सुलझा तो किराए के लिए अगले साल के बजट का इंतजार करना पड़ेगा।
कॉन्ट्रैक्ट के समय कलेक्टोरेट दर तय नहीं हो पाई