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तीन माह बाद पुलिस को मिले छह आरोपी, अब चालान की तैयारी

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। नसबंदी कांड को 90 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन मामले की जांच की दिशा अभी भी तय नहीं हो पाई। पुलिस अब कोर्ट में चालान पेश करने जा रही है। मामले में अभी तक छह आरोपी बनाए गए हैं। इसमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें से एक की जमानत हो चुकी है। इतने बड़े कांड जिसकी चर्चा देश दुनिया में रही, उसमें के सिर्फ तीन आरोपी ही जेल में हैं। दवा कंपनी के निर्माता वितरक तीन भाइयों में से दो अभी भी फरार हंै। पुलिस ने उनकी संपत्ति कुर्क करने के दावे किए थे पर ये भी हवा हो गए।

पुलिस ने 10 नवंबर 2014 से नसबंदी कांड की जांच शुरू की। इससे लगा कि इस हाईप्रोफाइल मामले में स्वास्थ्य महकमे से बड़ी संख्या में अपराधी बनेंगे और नामजद एफआईआर दर्ज होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पुलिस की जांच दिखावे के लिए होती रही। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जिन छह लोगों को नामजद आरोपी बनाया वही अंत तक बने रहे। इनमें भी जो आसानी से घर में मिल गए उन्हें ही गिरफ्तार किया गया। चार आरोपियों में से दो को ही बिलासपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। इनमें से एक डाॅ. राजेश गुप्ता की जमानत हो चुकी है। कविता फार्मेसी के संचालक तीन भाइयों में से दो अभी भी फरार हैं। पुलिस इस मामले की जांच पूरी बता रही है और चालान पेश करने की तैयारी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होने की बात सामने रही थी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्हें क्लीन चिट दे दे दी गई। प्रदेश का हाईप्रोफाइल मामला होने के बाद भी पुलिस ने इसे आम केस की तरह ही ट्रीट किया। पुलिस सिप्रोसीन ब्रूफेन टेबलेट की अभी तक जांच नहीं करवा सकी है। गौरतलब है कि 8 नवंबर 2014 को पेंडारी के नेमीचंद जैन हॉस्पिटल में नसबंदी ऑपरेशन शिविर लगा था।

विपक्ष भी शांत पड़ गई

इस मुद्दे को लेकर शुरुआती दौर में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे जोर शोर से उठाने का प्रयास किया पर धीरे धीरे वह शांत पड़ती गई। जिन्होंने आगे आकर विरोध किया पुलिस उनके पीछे ही पड़ गई।

लैब से नहीं आई रिपोर्ट

मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने दवाओं की जांच अपने स्तर पर करवाने इन्हें लैब भेजा था। एक ने तो जांच करने से मना कर दिया, अब दूसरे के पास भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट चालान पेश होने के बाद आएगी।