पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अब नागा शैली में नजर आएंगे गोल बाजार के विरासती द्वार

अब नागा शैली में नजर आएंगे गोल बाजार के विरासती द्वार

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गोल बाजार को उसके वैभव के अनुरूप संवारने की कवायद तेज हो गई है। पहले बिजली खंबों की िशफ्टिंग हुई और अब इसके चारों द्वारों को नया लुक देने का काम शुरू हो गया है। गोल बाजार के व्यापारियों ने कई आर्किटेक्ट और इंजीनियरों से पुराने गेट की जगह नए गेट की डिजाइन बनवाई। शनिवार को इनमें से एक डिजाइन फाइनल कर इसे नगर निगम कमिश्नर रानू साहू को सौंपा गया। नई डिजाइन के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार के चारों द्वार नागा शैली में नजर आएंगे। कमिश्नर ने मातहतों को निर्माण कार्य शुरू करने के लिए टेंडर करवाने के निर्देश दिए हैं।

गोल बाजार के 77 साल पुराने गेट की पहचान को कायम रखते हुए जो डिजाइन तय की गई, उसे इस्टीमेट के साथ व्यापारियों ने शनिवार को निगम कमिश्नर रानू साहू को सौंपी। व्यापारियों की गुजारिश पर वे छुट्‌टी के दिन दफ्तर पहुंची। उन्होंने व्यापारियों से जाना कि वे अपने पूर्वजों का कारोबार ही संभाल रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि गोल बाजार के नए गेट का निर्माण उसकी पुरानी पहचान को बनाकर रखते हुए जनभावनाओं के अनुरूप किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में गोल बाजार व्यापारी संघ (अ) के अध्यक्ष कृष्णमोहन पांडे, संयोजक सुधीरा खंडेलवाल, (ब) के अध्यक्ष मनीष सराफ, रूपा डोडवानी, प्रताप आईलानी और अशोक मोटवानी समेत अन्य शामिल थे।

शुरुआत में सुविधाएं थीं, अब नदारद

गोलबाजार का निर्माण 1937 में म्युनिस्पैलिटी के तत्कालीन चेयरमैन कुंजबिहारी अग्निहोत्री के नाम पर किया गया था। अग्निहोत्री ने बसाने से पहले पेरिस की यात्रा कर वहां के बाजारों का जायजा लिया था। इसके बाद गोल बाजार डिजाइन हुआ। चारों ओर से खुलने वाले बाजार के गेट और भीतर प्रसाधन सहित बुनियादी सुविधाओं का पूरा बंदोबस्त किया गया था, जो अब नदारद हो गया है।

ऐेतिहासिक गेट के साथ तस्वीर खिंचवाई

1अगस्त को गोल बाजार के जर्जर गेट का प्लास्टर गिर गया था। इसके बाद आम लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर ‘दैनिक भास्कर’ ने पुराने स्ट्रक्चर को ढहाकर उसकी जगह नए गेट बनाने की मुहिम शुरू की। गोल बाजार के व्यापारियों और निगम प्रशासन के बीच गोलमेज काॅन्फ्रेंस करवाई गई। इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से ऐतिहासिक गेट की पहचान को कायम रखते हुए नवनिर्माण का निर्णय लिया गया। बाजार के तीनों व्यापारी संघ और उनके प्रतिनिधियों के बीच समन्वय से इसकी रूपरेखा तय हु