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विवादित जमीन का सीमांकन करवाने गया अमला बैरंग लौटा

7 वर्ष पहले
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विवादितजमीन का सीमांकन करवाने गया अमला उल्टे पांव तब लौट आया, जब वहां विवाद की स्थिति निर्मित होने लगी। इससे पहले आनन-फानन में सीमांकन आदेश जारी हुआ। यानी एक दिन पहले आवेदन मिला और दूसरे ही दिन अमला सीमांकन के लिए पहुंच गया। ऐसी सक्रियता पेंडिंग मामले के निपटारे में नहीं दिखती। कई जगह तो दर्जनों सरकारी निर्माण के लिए ही सीमांकन के मामले लंबित हैं।

मामला मुंगेली नाका रोड का है। पटवारी हल्का नंबर 35 में सीमांकन के लिए कलिंद्री पति नारायण प्रसाद ने तहसीलदार के पास आवेदन किया था। तहसीलदार ने 13 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच सीमांकन करवाने की बात कही। राजस्व निरीक्षक ने सीमांकन के दौरान कलिंद्री की जमीन से लगी जमीन मालिकों हरीश येडेकर, गणेश येडेकर और राकेश साहू को वहां मौजूद रहने के लिए कहा था। राजस्व निरीक्षक साहू और पटवारी धीरेंद्र सिंह सीमांकन के लिए पहुंचे तो ओंकार प्रसाद यादव पिता सागर प्रसाद यादव ने लिखित में आपत्ति जताई। उन्होंने व्यवहार न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए खुद को भूमि मकान का मालिक बताया। कहा कि सीमांकन इसलिए नहीं हो सकता, क्योंकि यह मामला आयुक्त के पास अपील में है। दूसरा पक्ष भी विवाद करने लगा। विवाद बढ़ता देखकर राजस्व अमला बगैर सीमांकन ही लौट आया।

विवाद वाली स्थिति में नहीं किया जाता सीमांकन

^सीमांकनआदेश करने के पहले जमीन विवादित है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं होती। अमला मौके पर पहुंचता है और अगर वहां विवाद की स्थिति बनती है, तब सीमांकन नहीं किया जाता। इस संबंध में सख्त हिदायत भी दी गई है। -जय उरांव, तहसीलदार