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हिंदी में पेश होनी चाहिए याचिका

7 वर्ष पहले
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हिन्दीदिवस पर रविवार को कई कार्यक्रम किए गए। छुट्टी का दिन होने से सभी ने राजभाषा के सम्मान के लिए वक्त निकाला। विचार गोष्ठी में विद्वानों ने हिन्दी को समृद्ध करने पर अपने विचार रखे।

इस दौरान बिलासपुर यूनिवर्सिटी में उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी थे। उन्होंने कहा कि उन्हेंं हिन्दी में काम करने में कोई दिक्कत नहीं होती, हिंदी में ज्यादा संख्या में याचिका पेश की जानी चाहिए। उन्होंने हिंदी को समृद्ध भाषा बताते हुए कहा संविधान में अन्य भारतीय भाषाओं को महत्व देते हुए छोटे संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद 348 में संशोधन कर अन्य भाषा के रूप में हिंदी को न्यायिक क्षेत्र में भी उचित स्थान दिलाया जा सकता है। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता दयाराम शर्मा, डॉ. निर्मल शुक्ला, डॉ. टीएन दुबे, पं. विजय शंकर मिश्रा, डॉ. शैलेंद्र बाजपेयी ने विधि के क्षेत्र में हिं्दी की उपादेयता विषय पर व्याख्यान दिया। अधिवक्ताओं ने न्यायालयों का कार्य हिन्दी में किए जाने पर जोर दिया। इसके पीछे उनका तर्क था कि पक्षकार ज्यादातर इसी भाषा को समझते हैं और उन्हे उनकी भाषा में आदेश और न्याय मिलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद् और बिलासा कला मंच ने संयुक्त कार्यक्रम कर हिंदी दिवस मनाया। इसमें हिंदी दशा और दिशा विषय पर संगोष्ठी और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि समीक्षक और भाषाविद् डॉ. विनय कुमार पाठक थे। अध्यक्षता डॉ. सोमनाथ यादव ने की। विशिष्ट अतिथि डॉ. विजय सिन्हा थे। इसमें डॉ. पाठक ने कहा कि हिंदी को राज्याश्रय भले मिल सका हो लेकिन वह लोकाश्रय के कारण देश की वाणी और राष्ट्रभाषा के रूप में लोकप्रिय है। इसमें डॉ. पुष्पा दीक्षित, बल्लू दूबे, चंद्रप्रकाश बाजपेयी, शिवप्रसाद दीक्षित सहित अन्य उपस्थित थे। डीपी विप्र कॉलेज में हिंदी दिवस पर हिन्दी पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया। इसमें मुख्य अतिथि डॉ. अंजू शुक्ला थीं। उन्होंने हिन्दी की महत्ता पर अपने विचार रखे। इसमें हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. केके शर्मा, डॉ. शिवानी साहा, डॉ. आंचल श्रीवास्तव, डॉ. सुरुचि मिश्रा, डॉ. विवेक अंबलकर, डॉ. एमएल जायसवाल सहित अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

बिलासपुर यूनिवर्सिटी के सभाकक्ष में हि