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- एसडीएम कोर्ट में बेवजह चल रहे मामले, जिनके खिलाफ होनी थी एफआईआर उन्हें पेशी दी जा रही
एसडीएम कोर्ट में बेवजह चल रहे मामले, जिनके खिलाफ होनी थी एफआईआर उन्हें पेशी दी जा रही
मस्तूरीकी एसडीएम कोर्ट में राजस्व के दर्जनों मामले पेंडिंग हैं। इन पर सुनवाई कर निपटारा करने के बजाय गैरजरूरी पेशी और मामले चलाने का खुलासा हुआ है। समय और धन की बर्बादी करते हुए एसडीएम कोर्ट में जबरन ऐसे मामलों में पेशी बुलवाई जाती है। धान खरीदी और राशन दुकानों में गड़बड़ी के मामले में एसडीएम को कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर के लिए लिखना चाहिए, लेकिन वे खुद ही महीनों आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं। उनके ही आदेश में जांच करने वाले अधिकारी को उसी मामले में समंस भेजकर कोर्ट में बयान देने के लिए कहा जाता है।
दैनिक भास्कर के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक एसडीएम जीपी चौधरी (अब तबादला हो चुका है) द्वारा बिटकुला राशन दुकान में मृतक के नाम पर दूसरे व्यक्ति को राशन देने, ठाकुरदेवा में जमीन नहीं होने के बावजूद पौने पांच लाख का धान बेचने, दर्राभाठा राशन दुकान संचालक विक्रेता द्वारा फर्जी वितरण राशन की अफरा-तफरी करने और धनिया में कम राशन दिए जाने के मामले को जबरन कोर्ट में चलाया जा रहा है। बिटकुला का मामला एक साल से पेंडिंग है, जबकि अन्य मामलों में भी कई-कई महीने से सुनवाई चल रही है। ये सभी मामले आपराधिक श्रेणी के हैं और इनमें अफसरों के निर्देश के बावजूद एसडीएम ने एफआईआर नहीं करवाई।
दुकानदार ने राशन में मारी डंडी
सीपत के धनिया में फूड इंस्पेक्टर की जांच में खुलासा हुआ कि दुकानदार ने मई में कई कार्डधारियों को 35 किलो की जगह 30 किलो खाद्यान्न दिया है। रजिस्टर चेक करने पर पता चला कि 140 गुलाबी कार्ड में 123 को 35 की जगह 30 किलो और 524 नीले कार्डधारियों में से 446 को 30 किलो खाद्यान्न मिला है। अप्रैल में 44 कार्डधारियों के खाद्यान्न में अफरा-तफरी भी पता चली। प्रभारी समिति प्रबंधक राजकुमार तिवारी ने बाद में खाद्यान्न वितरण करने की बात कही, लेकिन फूड इंस्पेक्टर ने उससे पूछा कि खाद्यान्न होने के बाद भी पांच किलो कम क्यों दिया गया तो वह जवाब नहीं दे सका। तिवारी के अलावा सेल्समैन पुरुषोत्तम रजक को भी दोषी पाया गया। कलेक्टर के निर्देश के बावजूद एसडीएम ने एफआईआर नहीं करवाई।
सभी को सुनवाई का मौका दिया जाता है
सीधी बात
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी जांचकर्ता अधिकारी को ही समंस भेजकर कोर्ट में बयान दर्ज करवाने के लिए कहा जाता है
आप जांच पूरी होने के बाद भी