पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सिलेंडरों से चल रहे वाहन, दो दिन में जांच भी शुरू नहीं हुई

सिलेंडरों से चल रहे वाहन, दो दिन में जांच भी शुरू नहीं हुई

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहरकी सड़कों पर बेखौफ डोमेस्टिक सिलेंडर लगी गाड़ियंा दौंड़ रही है, पर जिम्मेेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं है। दो दिन पहले ट्रैफिक और परिवहन विभाग के अफसरों ने इसमें कार्रवाई का आश्वासन दिया है, पर वे इसकी जांच करना भूल गए हैं। इससे ऐसे वाहन संचालकों का हौसला बढ़ता जा रहा है।

डीबी स्टार टीम ने पड़ताल कर बताया था कि बाजार में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम का तोड़ चारपहिया वाहन चालकों ने निकाल लिया है। पहले नए वाहन के एक-दो साल चलने के बाद लोग गैस कीट लगवाते थे। अब ऐसा नहीं है। इन दिनों लोग नई गाड़ियों तक में गैस किट लगवा रहे हैं। अधिकृत रूप से इस गैस किट में सीएनजी का इस्तेमाल किया जाना है लेकिन इस नियम का कोई पालन नहीं करता। सभी चार पहिया वाहन मालिक किट में सीएनजी की बजाय घरेलू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्कूली वैन में इसका ज्यादातर इस्तेमाल हो रहा है।

शहर के अधिकांश निजी स्कूलों में बच्चों को स्कूल लाने और घर छोड़ने में बस, आॅटो रिक्शा और वैन का इस्तेमाल होता है। इसमें भी वैन की संख्या सर्वाधिक है। हर बड़े स्कूल में 20 से 25 वैन बच्चों को छोड़ने का काम कर रही है। इन सभी वैन मालिकों ने अपनी गाड़ियाें में गैस किट लगवा रखी है। वैन के पिछले हिस्से में काले रंग की यह गैस कीट नजर आती है। एक गैस किट को पूरा भरने के लिए दो घरेलू सिलेंडर लग जाते हैं। गैस एजेंसी में एक गैस सिलेंडर की कीमत पेट्रोल के मुकाबले काफी कम है और यह उन्हें हर तरह से सस्ती पड़ती है। एक बार किट फुल कराने पर करीब 600 से 700 किमी. का एवरेज हासिल होता है। अन्य वाहनों के मुकाबले वैन का एवरेज भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि वैन चालक पेट्रोल की बजाय गैस से गाड़ी चलाना ज्यादा फायदेमंद समझते हैं। इसके बाद भी दोनों विभाग के अधिकारी इसकी ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

फॉलोअप