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लिपिकों की ड्यूटी सुबह 7 बजे से लगाई, शुरू हुआ विरोध

7 वर्ष पहले
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शिक्षाविभाग में शासकीय स्कूलों की क्लासेस की तर्ज पर ऑफिस के काम-काज से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों की ड्यूटी सुबह 7 बजे से लगा दी गई है। इसे तुगलकी फरमान बताते हुए डीईओ की नई व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के लिपिकों, कर्मचारियों ने एक दिन की छुट्‌टी लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने शिक्षा विभाग के कार्यालयीन अमले को सुबह 7 बजे से ड्यूटी करने का आदेश दिया है। आमतौर पर विभाग में लिपिकों का कार्यालयीन समय सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे तक है। आदेश के पीछे स्कूलों और दफ्तरों की टाइमिंग में एकरूपता लाने का हवाला दिया गया है। इसके साथ ही इस आदेश को तुगलकी बताते हुए जमकर विरोध शुरू हो गया है। विभाग के अलावा तमाम स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों ने एक दिन काम बंद रखकर रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे कर्मचारियों ने डिप्टी कलेक्टर एसपी वैद्य को मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, संभागायुक्त और कलेक्टर के नाम पर ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि कार्यालयों के कर्मचारियों की अपनी अलग कार्यपद्धति है। इसमें ट्रेजरी के अलावा ऊपरी स्तर के दफ्तरों के काम-काज उन्हें करने होते हैं। उन्हें स्कूल के बच्चों की टाइमिंग में दफ्तर बुलाना सही नहीं है। कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के बैनर तले तब तक आंदोलन जारी रखने बात कही है, जब तक आदेश निरस्त हो जाए। चेतावनी रैली में संघ के जिलाध्यक्ष रोहित तिवारी, प्रांत महामंत्री केएस ठाकुर, सुनील यादव, एसआर रिजवी, अर्चना सिंह गौतम, स्मृति वर्मा, सुरेश दिनकर समेत स्कूल शिक्षा विभाग के लिपिक और कर्मचारी शामिल थे।