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नगर निगम के अमले ने पीओपी से बनी दुर्गा की 46 बड़ी मूर्तियां जब्त की
नगरनिगम के अतिक्रमण निवारण दस्ते ने मंगलवार को सुबह लिंक रोड पर सड़क किनारे पंडाल लगाकर प्रतिबंधित प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से मूर्तियां बनाने वालों के यहां दबिश दी। मौके से पीओपी से बनाई गई 46 दुर्गा प्रतिमाएं जब्त की गईं। इनमें 28 बड़ी प्रतिमाएं शामिल हैं, जिन्हें ढोने में निगम के दो-दो काउकैचर को तीन मर्तबा फेरे लगाने पड़े। जब्त प्रतिमाएं बिलासा डेयरी मोपका में रखी गई हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जल स्त्रोंतो को प्रदूषित करने वाले पीओपी निर्मित मूर्तियों की बिक्री और नदी, तालाबों में इनके विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इसे प्रदेशभर के नगरीय निकायों को लागू करने के लिए कहा था। निर्देश के मुताबिक गणेशोत्सव में ही पीओपी से गणेश प्रतिमाओं के निर्माण, बिक्री और नदी, तालाबों में विसर्जन पर प्रतिबंध लगाना था। जब तक इस आदेश को अमल में लाया जाता, शहर में पीओपी से हजारों मूर्तियों का निर्माण हो चुका था। कमिश्नर रानू साहू के निर्देश पर निगम के अधिकारियों की टीम ने शहर में मूर्तियां बनाने और बेचने वालों का सर्वे किया था। इसके मुताबिक शहर में 22 जगहों पर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा था। इन्हें दुर्गोत्सव के लिए पीओपी की मूर्तियां नहीं बनाने के लिए नोटिस दिया गया था। कमिश्नर के निर्देश पर पीओपी की मूर्तियों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए निगम का अभियान मंगलवार से शुरू हो चुका है। निगम दस्ते के प्रभारी प्रमिल शर्मा ने बताया कि पीओपी की प्रतिबंधित मूर्तियों की जब्ती के लिए सोमवार की रात को कुछ स्थानों पर दबिश दी गई थी, जिसके आधार पर जब्ती की कार्रवाई की गई। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
लिंक रोड में चहारदीवारी के अंदर पंडाल डालकर प्लास्टर ऑफ पेरिस से दुर्गा प्रतिमाएं बनाई जा रही थी। इन्हें जब्त करता अमला।
मूर्तिकारों ने शहर छोड़ गांवों में डाला डेरा
खबरहै कि राजस्थान सहित अन्य शहरों से आकर पीओपी की मूर्तियों का कारोबार करने वाले कलाकारों ने निगम की कार्रवाई की भनक लगते ही निगम सीमा से पलायन कर दिया है। कुछ दिन पहले तक इनका डेरा अरपा पार रिकांडो बस्ती, कुम्हार पारा, तेलीपारा, पुराने बस स्टैंड के पीछे और कश्यप काॅलोनी पर देखा गया था। बताया जाता है कि खास तौर पर राजस्थानी मूर्तिकारों का दल रतनपुर, सकरी और सीपत की