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किसानों के रजिस्ट्रेशन में पटवारियों की शिकायत मिली तो खैर नहीं

7 वर्ष पहले
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किसानोंका पंजीयन शीघ्रता से करने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा है कि उन्हें किसी भी हालत में पटवारियों की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारियों को अपने स्तर पर इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

इन दिनों सोसायटियों में ऐसे किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जो खरीफ सीजन 2014-15 में धान बेचना चाहते हैं। किसान पंजीयन कराने सोसायटियों में जा रहे हैं तो उन्हें पंजीयन कराने में कई तरह की असुविधा हो रही है। कहीं कंप्यूटर खराब है तो कई सोसायटियों में पटवारी ही नहीं जा रहे हैं। इतना ही नहीं अब उन्हें बैंकों में खाता खुलवाने कहा जा रहा है ताकि उन्हें धान का समर्थन मूल्य लेने में कोई परेशानी हो। पटवारियों की वजह से किसानों का पंजीयन ज्यादा प्रभावित हो रहा है। पटवारियों की ड्यूटी सोसायटियों में किसानों के पंजीयन के लिए लगाई गई है लेकिन वे जा ही नहीं रहे हैं। जिसकी वजह से किसानों को भटकना पड़ रहा है। दरअसल किसानों के पास कुल कितनी जमीन है और वह इस साल कितने एरिया में खेती कर रहा है, इसकी जानकारी पटवारी के पास है। किसानों को जो फार्म जमा करने कहा जा रहा है, उसमें कुल रकबा, खेती का रकबा सहित खेती से जुड़ी अन्य जानकारी देनी है और बगैर पटवारी के सत्यापन के सोसायटी में यह जमा नहीं हो रहा है।

भास्कर की खबर के बाद शामिल हुआ टीएल में

दैनिकभास्कर ने इस संबंध में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए समय सीमा की बैठक में इस मुद्दे को चर्चा में शामिल करवाया और अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों का पंजीयन तीस सितंबर तक होना है, लेकिन यह बेहद धीमी गति से हो रहा है। सोसायटियों में कम्प्यूटर खराब होने और कर्मचारियों की कमी होने के साथ पटवारियों के गैर हाजिर होने की शिकायतें मिल रही है। उन्हें यह शिकायत मिले कि पटवारी का प्रतिवेदन नहीं मिलने के कारण किसानों का पंजीयन नहीं हो रहा है। उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारियों को अपने स्तर पर व्यवस्था देखने के निर्देश दिए।