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राजधानी में बिछेगी भूमिगत नाली, 485 करोड़ की योजना को केंद्र की मंजूरी
राजधानीमें 1050 किमी लंबा अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम बनेगा। भूमिगत नाली बिछाने के लिए 485 करोड़ रुपए की इस योजना को केंद्र सरकार ने तकनीकी स्वीकृति दे दी है। मिशन सिटी और स्मार्ट सिटी योजना के तहत जल्द ही वित्तीय मंजूरी भी मिलने की उम्मीद है। नगर निगम प्रशासन ने तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद शहर को चार जोन में बांटकर भूमिगत नाली बनाने का खाका तैयार कर लिया है। भूमिगत नालियों को मेट्रो टेक्नालॉजी के माध्यम से बनाया जाएगा। चूंकि शहर की सभी प्रमुख सड़क बन चुकी हैं, इसलिए खुदाई ओपन नहीं होगी। सड़क के नीचे खुदाई करके नालियों का जाल बिछाया जाएगा। इस योजना में शहर के चार कोनों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। शेष|पेज7
आलाअफसरों के मुताबिक दो साल पहले 300 करोड़ रुपए से रायपुर में 18 चरणों में अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम बनाने की योजना बनी थी। केंद्र सरकार ने तकनीकी मंजूरी देने से पहले इसी को बदलकर शहर को चार जोन में बांटने की सिफारिश की है। वह योजना सिंगापुर की कंपनी की सर्वे रिपोर्ट पर आधारित थी। इसमें तब्दीली करके केंद्र सरकार ने 485 करोड़ रुपए की योजना का खाका मंजूर किया है।
मेट्रो टेक्नालॉजी इसलिए
बिलासपुर में सड़क को खोदकर पूरे शहर में भूमिगत नालियों का जाल बिछाया जा रहा है। सड़क खुदाई की वजह से पूरे शहर में धूल का गुबार और प्रदूषण फैल गया। यही नहीं, नाली के लिए किए गए गड्ढे में डूबकर एक बच्चे की मौत के बाद बिलासपुर एक दिन बंद हो गया था। सरकार यह स्थिति दोबारा नहीं चाहती। इसलिए मेट्रो टेकनॉलाजी को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। मूलत: ये वही तकनीक है, जिससे दिल्ली में मेट्रो ट्रेन की लाइनें बिछीं। इसमें खुदाई भूमिगत हुई और सड़क पर किसी को पता ही नहीं चला।
कोट
- पहले अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की योजना जेएनयूआरएम के तहत थी। केंद्र में सरकार बदली तो प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी योजना में शामिल कर लिया गया। जो तकनीकी स्वीकृति मिली है, इसमें दो-दो जोन का काम दो चरणों में प्रस्तावित है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही ग्लोबल टेंडर जारी करेंगे।
किरणमयी नायक, महापौर रायपुर
15 वार्डों में 60 किमी लाइन
राजधानीबनने से पहले रायपुर में 80 के दशक में पुराने 15 वार्ड में 60 किमी भूमिगत नालियां बनाई गई थीं। इनका उपयोग आज भी हो रहा है,